लॉस एंजिलिस 2028 की ओर भारतीय मुक्केबाजों का दबदबा: लिवरपूल में ऐतिहासिक जीत के बाद ओलंपिक पर नजर
लॉस एंजिलिस 2028 ओलंपिक की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, और भारतीय मुक्केबाजी के सितारे एक अभूतपूर्व जीत के साथ इस बहुप्रतीक्षित खेल महाकुंभ की ओर बढ़ रहे हैं। लिवरपूल में हाल ही में संपन्न विश्व चैंपियनशिप में भारतीय महिला मुक्केबाजों ने विदेशी धरती पर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए इतिहास रचा है। इस शानदार सफलता के बाद, भारत की उभरती हुई स्टार जैस्मीन लंबोरिया ने अपनी सारी ऊर्जा लॉस एंजिलिस की तैयारियों में झोंकने का संकल्प लिया है।
57 किग्रा वर्ग में पेरिस ओलंपिक की रजत पदक विजेता जूलिया सेरेमेटा को हराकर अपना स्वर्ण पदक का इंतजार खत्म करने वाली जैस्मीन ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, “यह वाकई में एक अविश्वसनीय अहसास है। स्वर्ण पदक जीतना अपने आप में बहुत बड़ा सुख है। मेरे कोचों ने मेरे खेल को निखारने में जो भूमिका निभाई है, वह अनमोल है। मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं।” दो बार पदक से चूकने के बाद, 24 वर्षीय जैस्मीन के लिए यह जीत अत्यधिक संतोषजनक है, और अब उनका पूरा ध्यान ओलंपिक पदक पर केंद्रित है। उनके कोच संदीप लंबोरिया को पूरा भरोसा है कि जैस्मीन 2028 में इतिहास रचेंगी, क्योंकि वह ओलंपिक भार वर्ग में पदक जीतने वाली अकेली भारतीय महिला हैं।
स्वर्ण पदक विजेता मीनाक्षी हुड्डा, जिन्होंने 48 किग्रा वर्ग में पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता नाजिम काइजेबे को हराकर शानदार जीत दर्ज की, अब नवंबर में भारत में होने वाले विश्व कप पर अपनी नजरें गड़ाए हुए हैं। अपने विश्व चैंपियनशिप पदार्पण में ही स्वर्ण जीतने वाली मीनाक्षी का लक्ष्य है कि वह घरेलू धरती पर देश का नाम रोशन करें। उन्होंने स्वीकार किया कि “कोई भी व्यक्ति परफेक्ट नहीं होता” और उन्हें अपने कौशल पर लगातार काम करने की आवश्यकता है, क्योंकि हार से बहुत कुछ सीखने को मिलता है।
लिवरपूल में रजत पदक जीतने वाली नूपुर श्योराण ने बताया कि भारत के चार पदकों (दो स्वर्ण, एक रजत, एक कांस्य) ने टीम को विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा, “हमारा अनुभव शानदार रहा। भारत कुल मिलाकर तीसरे स्थान पर रहा। हमने चार पदक जीते। अब भारत नवंबर में विश्व कप की मेजबानी करेगा और हम देश के लिए और अधिक से अधिक पदक जीतने की कोशिश करेंगे।”
कांस्य पदक विजेता पूजा रानी (80 किग्रा) ने हवाई अड्डे पर दल का भव्य स्वागत देखकर अभिभूत होने की बात कही। यह उनकी चौथी विश्व चैंपियनशिप थी और पहला पदक, जिसने उन्हें बहुत खुशी दी है। उन्होंने भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने का वादा किया।
दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन, भले ही इस बार पदक से चूक गईं, लेकिन उन्होंने हार से निराश न होकर कड़ी मेहनत जारी रखने का प्रण लिया है। क्वार्टर फाइनल में तुर्की की शीर्ष मुक्केबाज से हारने के बावजूद, निकहत अपने प्रदर्शन से संतुष्ट हैं और मानती हैं कि तैयारी में कुछ कमियां थीं। उन्होंने कहा, “मेरा मंत्र हमेशा कड़ी मेहनत करना रहा है, चाहे मेरे सामने कितनी भी चुनौतियां क्यों न आएं।” निकहत का एकमात्र और स्पष्ट लक्ष्य अब लॉस एंजिलिस में ओलंपिक पदक जीतना है। वह खुद पर विश्वास बनाए रखती हैं और मानती हैं कि पेरिस बीत चुका है, और उनका अगला पड़ाव लॉस एंजिलिस है।
भारतीय महिला मुक्केबाजों का यह ऐतिहासिक प्रदर्शन न केवल उनके व्यक्तिगत प्रयासों का प्रमाण है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में देश के लिए एक मजबूत खेल संस्कृति के निर्माण का भी संकेत देता है। लॉस एंजिलिस 2028 के लिए उनका आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प निश्चित रूप से उन्हें नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।
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