न्यूजीलैंड दौरे से पहले चमके यशस्वी जायसवाल, तूफानी शतक जड़कर टीम इंडिया की बढ़ाई ताकत
क्राइस्टचर्च, तीन नवंबर। आगामी टेस्ट श्रृंखला से ठीक पहले भारतीय टीम प्रबंधन के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने भारत ए और न्यूजीलैंड ए के बीच मंगलवार को यहां ड्रॉ समाप्त हुए दूसरे अनौपचारिक टेस्ट क्रिकेट मैच में शानदार शतक जड़कर अपनी जबरदस्त फॉर्म का अहसास कराया है। जायसवाल ने मैच के चौथे और अंतिम दिन न्यूजीलैंड ए के गेंदबाजी आक्रमण की जमकर धुनाई करते हुए केवल 162 गेंदों में नाबाद 155 रन बनाए, जिसमें 15 चौके और पांच गगनचुंबी छक्के शामिल हैं। विदर्भ के बाएं हाथ के बल्लेबाज यश राठौड़ ने भी नाबाद 100 रनों की शानदार पारी खेली, जिससे भारत ए ने अपनी दूसरी पारी में दो विकेट पर 282 रन का मजबूत स्कोर खड़ा किया।
इसके बाद दोनों कप्तानों ने आपसी सहमति से मैच को ड्रॉ समाप्त करने का फैसला किया। राठौड़ के अपने करियर का शतक पूरा करने के तुरंत बाद मैच समाप्ति की घोषणा कर दी गई। राठौड़ और जायसवाल ने तीसरे विकेट के लिए मैदान पर रिकॉर्ड 247 रनों की नाबाद और ऐतिहासिक साझेदारी निभाई।
राठौड़ ने अपनी संयम से भरी 122 गेंदों की पारी में नौ शानदार चौके लगाए। आपको बता दें कि इस मुकाबले में भारत ए ने अपनी पहली पारी में 346 रन बनाए थे, जबकि मेजबान न्यूजीलैंड टीम ने 424 रन बनाकर बढ़त हासिल की थी। मैच के अंतिम पड़ाव में हैगली ओवल की पिच काफी हद तक सपाट हो गई थी, जिससे बल्लेबाजों के लिए अपने शॉट खेलना और रन बनाना बेहद आसान हो गया था।
इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत ए ने अपनी दूसरी पारी में बेहद आक्रामक अंदाज में 5.35 के शानदार रन-रेट से रन बटोरे। मैच के अंतिम दिन लगभग 44 ओवरों का खेल हुआ और इस दौरान युवा सनसनी यशस्वी जायसवाल पूरी तरह आकर्षण का केंद्र बने रहे। हैरानी की बात यह है कि जायसवाल इस मैच से पहले खराब फॉर्म से जूझ रहे थे, जो मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए 19 नवंबर से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की मुख्य श्रृंखला से पहले निश्चित रूप से बड़ी चिंता का विषय बना हुआ था।
गौरतलब है कि जायसवाल ने इस मुकाबले से पहले अपनी पिछली तीन पारियों में महज 17, पांच और शून्य रन बनाए थे। यहां तक कि न्यूजीलैंड दौरे के लिए भारत ए टीम में शामिल होने से पहले उन्होंने चंडीगढ़ के खिलाफ खेले गए एकमात्र रणजी ट्रॉफी मैच में भी वह अपना खाता तक नहीं खोल पाए थे। बहरहाल, भारत ए ने चौथे दिन की शुरुआत बिना किसी नुकसान के 32 रन से की, लेकिन उसने अपने दूसरे सलामी बल्लेबाज साई सुदर्शन (11) का विकेट जल्दी गंवा दिया, जो कल के अपने स्कोर में एक भी रन जोड़ने में नाकामयाब रहे।
दूसरी ओर, बेहतरीन फॉर्म में चल रहे देवदत्त पडिक्कल इस दूसरी पारी में अपना खाता भी नहीं खोल सके। उन्हें घातक तेज गेंदबाज ब्रेट रैंडेल ने पारी की पहली ही गेंद पर बोल्ड कर पवेलियन की राह दिखाई। हालांकि, एक छोर से विकेट गिरने के बावजूद यशस्वी जायसवाल ने बेहद आक्रामक रवैया अपनाया और क्रीज पर उन्हें यश राठौड़ के रूप में एक बेहतरीन और भरोसेमंद जोड़ीदार मिल गया।
इन दोनों बल्लेबाजों ने मैदान के चारों ओर शॉट लगाने में कोई कोताही नहीं बरती और गेंदबाजों पर पूरी तरह दबाव बनाए रखा। जायसवाल ने रैंडेल की गेंद पर डीप मिड-विकेट के ऊपर से करारा छक्का जड़कर अपने खतरनाक इरादे पूरी तरह स्पष्ट कर दिए थे। उन्होंने इसके अलावा क्रिस्टियन क्लार्क और जैरोड मैकाय की गेंदों पर भी कुछ दर्शनीय और क्लासिकल ड्राइव लगाए।
इस दौरान जायसवाल ने स्पिनर डीन फॉक्सक्रॉफ्ट को खासतौर पर अपने निशाने पर रखा। उन्होंने अपनी पारी के दौरान जड़े गए कुल पांच छक्कों में से चार छक्के अकेले फॉक्सक्रॉफ्ट की गेंदों पर ही लगाए। जैसे-जैसे कूकाबुरा गेंद पुरानी होती गई, मैच में गेंदबाजों के लिए कुछ भी खास मदद शेष नहीं बची थी।
पिच पर गेंद की उछाल एक समान होने के कारण बल्लेबाजों के लिए शॉट खेलना बहुत आसान हो गया था। जायसवाल ने एक शानदार स्लॉग स्वीप शॉट खेलकर प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपना 17वां शतक पूरा किया। शतक तक पहुँचने के बाद वह और अधिक आक्रामक हो गए और उन्होंने क्रीज से आगे बढ़कर कई मनमोहक और दर्शनीय शॉट खेले।
दूसरी ओर, पहले मैच में 44 और 66 रनों की उपयोगी पारियां खेलने वाले राठौड़ ने अपनी शानदार फॉर्म को यहां भी बरकरार रखा। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि क्यों उन्हें घरेलू क्रिकेट के सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिना जाता है। उन्होंने चायकाल के ठीक बाद विदेशी धरती पर अपना यह पहला शतक शान के साथ पूरा किया।
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