हाइलो ओपन का खिताब अपने नाम करने के बाद भारतीय बैडमिंटन स्टार लक्ष्य सेन अब अपनी इस शानदार लय को आगे भी जारी रखने के लिए पूरी तरह तैयार हैं और उनकी सीधी निगाहें प्रतिष्ठित बीडब्ल्यूएफ विश्व टूर फाइनल्स में धमाकेदार प्रदर्शन करने पर टिकी हैं। चोट की परेशानियों और एक बेहद व्यस्त शेड्यूल के बीच आई इस खिताबी जीत ने उनके आत्मविश्वास को बिल्कुल सही समय पर एक नई उड़ान दी है। इस शानदार सफलता की बदौलत विश्व रैंकिंग में आठ पायदान की छलांग लगाकर सीधे दसवें स्थान पर पहुंचे लक्ष्य ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, ‘‘मैं हाइलो ओपन के अपने प्रदर्शन से बेहद खुश हूं। ऑस्ट्रेलियाई ओपन के बाद एक बार फिर टूर्नामेंट जीतकर वाकई बहुत अच्छा महसूस हो रहा है और मैं इसी विनिंग रिदम को बनाए रखना चाहता हूं।’’
विश्व टूर फाइनल्स का टिकट पक्का करने के लिए लक्ष्य को विश्व रैंकिंग के टॉप-8 खिलाड़ियों में अपनी जगह बनानी होगी। अपने आगे के प्लान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आने वाले दो से तीन सप्ताह तक लगातार मुकाबले चलेंगे, जिसके बाद शेड्यूल थोड़ा राहत भरा होगा। फिलहाल मेरा पूरा फोकस विश्व टूर फाइनल्स पर है। मुझे लगता है कि अगले दो टूर्नामेंट बेहद अहम हैं क्योंकि मैं इस साल का अंत एक मजबूत प्रदर्शन के साथ करना चाहता हूं। यही वजह है कि जापान और हांगकांग की प्रतियोगिताओं में उतरने से पहले, कुछ दिन घर पर रहकर तरोताजा होना मुझे बहुत रास आ रहा है।’’ अल्मोड़ा के रहने वाले इस 25 वर्षीय युवा शटलर ने खुलकर यह स्वीकार किया कि पिछले कुछ महीनों में लगी चोटों की वजह से उनके खेल की निरंतरता पर थोड़ा असर जरूर पड़ा है।
अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘ऑल इंग्लैंड टूर्नामेंट में मेरा प्रदर्शन काफी शानदार रहा था। मैं फाइनल तक का सफर तय करने में सफल रहा और बेहतरीन फॉर्म में था। लेकिन उसके ठीक बाद के दो-तीन महीनों में मुझे कुछ चोटों का सामना करना पड़ा, जिसकी वजह से मैं मैदान पर अपना शत-प्रतिशत नहीं दे पाया।’’ लक्ष्य ने आगे कहा, ‘‘भारत में विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों जैसे बड़े मंच पर खेलना अपने आप में एक अविश्वसनीय अनुभव रहा। हालांकि, जैसा मैं चाहता था वैसा परिणाम नहीं मिला, लेकिन मैं इसके लिए पूरी तरह तैयार था। एक खिलाड़ी के तौर पर आपकी चाहत हर टूर्नामेंट को जीतने की होती है, और यही वजह है कि पिछला हफ्ता मेरे लिए बेहद संतोषजनक रहा।’’
चोटों से उबरने और अपनी मैच फिटनेस वापस पाने के कड़े संघर्ष पर प्रकाश डालते हुए लक्ष्य ने बताया कि लगातार सफर में रहने की वजह से उन्हें प्रैक्टिस कोर्ट पर नए प्रयोग करने का ज्यादा मौका नहीं मिल पाया। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, ‘‘मैं लगातार एक शहर से दूसरे शहर सफर कर रहा हूं, इसलिए ट्रेनिंग के दौरान नए दांव-पेच आजमाने के लिए ज्यादा वक्त ही नहीं मिला। जिन-जिन टूर्नामेंट्स में मैंने हिस्सा लिया, मैंने वहीं अपने खेल की कमियों पर काम करने की कोशिश की, हालांकि पिछले तीन-चार महीनों में इंजरी से निपटना वाकई एक चुनौतीपूर्ण दौर रहा था।’’
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