मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष के प्रदर्शन के बीच कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन से रोकने और विरोध के अधिकार को लेकर भी सवाल खड़े किए।
विपक्ष के प्रदर्शन के बीच कन्हैया का हमला
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और चुनाव प्रक्रिया को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार जारी है। दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं को प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।
गुरुवार, 8 अक्टूबर को पटना में भी विपक्षी दलों ने प्रदर्शन किया। इसी राजनीतिक माहौल के बीच कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।
“ये अराजकता नहीं, आपका फैलाया हुआ रायता है”
कन्हैया कुमार ने अपने एक्स हैंडल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक तीखी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि देश में जो स्थिति बनी है, वह अराजकता नहीं बल्कि उनके अनुसार प्रधानमंत्री मोदी का फैलाया हुआ “रायता” है।
कन्हैया ने आगे सरकार पर “धोखाधड़ी और चोरी” जैसे गंभीर आरोप लगाए। ये कन्हैया कुमार द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
जंतर-मंतर को लेकर सरकार पर सवाल
अपने दूसरे पोस्ट में कांग्रेस नेता ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि क्या जंतर-मंतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की निजी संपत्ति है, जहां विपक्ष और आम लोगों को जाने से रोका जा रहा है।
उन्होंने विद्यार्थियों, युवाओं, सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को प्रदर्शन से रोके जाने पर भी आपत्ति जताई।
“विरोध का अधिकार संवैधानिक हक”
कन्हैया कुमार ने दावा किया कि गांधी जयंती के बाद से लोग जंतर-मंतर पर निर्धारित विरोध स्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। उनके अनुसार पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों को रोक रही है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। कन्हैया ने अपने पोस्ट में सरकार के खिलाफ प्रतिकार की बात कहते हुए लोगों से अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील भी की।
विपक्ष और सरकार के बीच बढ़ा टकराव
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है और मतदाता सूची से जुड़े बदलावों ने कई सवाल खड़े किए हैं।
वहीं, सरकार और बीजेपी विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक विरोध का हिस्सा बताते रहे हैं। ऐसे में चुनाव आयोग की भूमिका और मतदाता सूची का मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव का कारण बना हुआ है।
आंदोलन का दायरा बढ़ने के संकेत
दिल्ली के बाद पटना समेत दूसरे शहरों में विपक्षी प्रदर्शन से साफ है कि यह मुद्दा अब राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन चुका है। कन्हैया कुमार जैसे नेताओं के लगातार बयान आने से कांग्रेस भी इसे व्यापक लोकतांत्रिक अधिकारों के सवाल से जोड़ रही है।
फिलहाल सवाल सिर्फ प्रदर्शन की अनुमति का नहीं है। असली बहस चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और संवैधानिक संस्थाओं पर जनता के भरोसे को लेकर है। आने वाले दिनों में विपक्ष का आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी
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