भारतीय सिनेमा के ‘कड़क’ अंदाज़ और बेमिसाल संवाद अदायगी के पर्याय, 75 वर्षीय दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे। उनके आकस्मिक निधन की खबर ने पूरे फिल्मी जगत और उनके करोड़ों प्रशंसकों को गहरे शोक में डुबो दिया है। गुरुवार की सर्द सुबह गोवा से एक दुखद समाचार आया कि अपने आवास पर दिल का दौरा पड़ने से अभिनय के इस चमकते सितारे का अंत हो गया।
बहुमुखी प्रतिभा के धनी नाना पाटेकर पणजी के समीप डोना पाउला स्थित अपने अपार्टमेंट में बेसुध पाए गए थे। उन्हें तत्काल निजी अस्पताल ले जाया गया, जहाँ चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके जाने से एक युग का अंत हो गया है। अक्षय कुमार, जिन्होंने 2007 की सुपरहिट फिल्म ‘वेलकम’ में उनके साथ ‘उदय शेट्टी’ जैसे यादगार किरदार को जीवंत होते देखा था, ने भावुक होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अक्षय कुमार ने ‘एक्स’ पर अपना दुख साझा करते हुए लिखा, “नाना जी के जाने की खबर से मन अत्यंत व्यथित है। वह उन दुर्लभ कलाकारों में से थे, जिन्हें पर्दे पर छा जाने के लिए शब्दों से ज्यादा अपनी आंखों की तीव्रता और ईमानदारी की जरूरत पड़ती थी। उनकी वह आवाज़ और सेट पर बिताई यादें हमेशा मेरे दिल के करीब रहेंगी। नाना जी वास्तव में बेमिसाल थे, यह मानना मुश्किल है कि वह अब नहीं रहे।” अक्षय ने हाल ही में 2025 की फिल्म ‘हाउसफुल 5’ में भी उनके साथ स्क्रीन साझा की थी।
वहीं, आर. माधवन ने नाना पाटेकर को अभिनय का एक “संस्थान” बताते हुए कहा कि 1991 की फिल्म ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ में उनके प्रदर्शन ने उन्हें एक अभिनेता बनने के लिए गहराई से प्रेरित किया था। माधवन ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “एक दिग्गज हमेशा के लिए विदा हो गया। रंगमंच और सिनेमा को दिए आपके अमूल्य पाठों के लिए धन्यवाद। आपके जैसा दूसरा कोई नहीं होगा।”
अभिनेत्री कंगना रनौत ने भी इस खबर पर हैरानी जताते हुए कहा कि नाना जी इतने फिट और स्वस्थ दिखते थे कि उनके निधन पर यकीन करना मुश्किल है। कियारा आडवाणी और भूमि पेडनेकर ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और उनके परिवार व प्रशंसकों के प्रति सहानुभूति प्रकट की।
कास्टिंग निर्देशक मुकेश छाबड़ा ने इस क्षति को अपूरणीय बताते हुए कहा कि वह इस खबर से पूरी तरह “स्तब्ध” हैं। 1978 में फिल्म ‘गमन’ से अपने अभिनय की शुरुआत करने वाले नाना पाटेकर को असली पहचान 1989 की फिल्म ‘परिंदा’ से मिली, जिसने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया। ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘तिरंगा’, ‘राजनीति’ और मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अभिनय के नए मानक स्थापित किए। कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2013 में ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया था। भारतीय सिनेमा के इतिहास में उनका नाम हमेशा स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।
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