छठ पूजा पर घर लौटने की तैयारी कर रहे लोगों के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती यात्रा की है। दिल्ली-NCR से बिहार जाने वाली ट्रेनों में लंबी वेटिंग और महंगी फ्लाइट्स के बीच कनेक्टिंग रूट अपनाकर सफर आसान और किफायती बनाया जा सकता है।
छठ पर बढ़ी घर लौटने की चिंता
छठ पर्व 13 से 16 नवंबर 2026 तक मनाया जाएगा। इस दौरान दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम से बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ती है। त्योहार नजदीक आते ही प्रमुख ट्रेनों में सीटें भरने लगी हैं और कई ट्रेनों में वेटिंग काफी लंबी हो चुकी है।
ऐसे में आखिरी समय तक सीधे कंफर्म टिकट का इंतजार करना परेशानी बढ़ा सकता है।
‘टुकड़ों में यात्रा’ हो सकती है बेहतर
अगर दिल्ली से पटना या बिहार के किसी शहर के लिए सीधी ट्रेन नहीं मिल रही है, तो पूरे सफर को एक ही टिकट पर पूरा करने के बजाय दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।
दिल्ली से पहले किसी बड़े ट्रांजिट शहर तक पहुंचें और वहां से बिहार के लिए दूसरी ट्रेन या बस पकड़ें। इससे विकल्पों की संख्या बढ़ जाती है।
पटना के लिए लखनऊ-कानपुर रूट
मध्य बिहार और पटना जाने वाले यात्रियों के लिए लखनऊ और कानपुर उपयोगी ट्रांजिट पॉइंट हो सकते हैं। दिल्ली-NCR से इन शहरों के लिए बस और ट्रेन के कई विकल्प मिलते हैं।
लखनऊ या कानपुर पहुंचने के बाद पटना की तरफ जाने वाली बस, ट्रेन या अन्य सार्वजनिक परिवहन तलाशा जा सकता है। यात्रा से पहले कनेक्शन का समय जरूर जांचें।
उत्तर बिहार के लिए गोरखपुर बेहतर विकल्प
मुजफ्फरपुर, सीवान, गोपालगंज, दरभंगा और चंपारण जैसे इलाकों में जाने वालों के लिए गोरखपुर एक अहम कनेक्टिंग हब है।
दिल्ली से गोरखपुर पहुंचने के बाद बिहार की ओर जाने वाली बसों और ट्रेनों का विकल्प तलाशा जा सकता है। उत्तर बिहार के यात्रियों के लिए यह सीधी दिल्ली-पटना यात्रा की तुलना में उपयोगी विकल्प बन सकता है।
गया, बक्सर और आरा के लिए वाराणसी-प्रयागराज
दक्षिण बिहार और पश्चिमी बिहार की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए वाराणसी और प्रयागराज भी महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट हैं। यहां पहुंचकर पटना, गया, बक्सर या आरा की तरफ सड़क और रेल कनेक्शन तलाशे जा सकते हैं।
हालांकि त्योहार के दौरान स्थानीय साधनों में भी भीड़ बढ़ सकती है, इसलिए कनेक्टिंग टिकट पहले से लेना बेहतर रहेगा।
फ्लाइट महंगी हो तो क्या करें?
छठ के आसपास दिल्ली-पटना हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में सीधे पटना की महंगी फ्लाइट लेने के बजाय दिल्ली से लखनऊ या वाराणसी तक उपलब्ध अपेक्षाकृत सस्ती उड़ान और फिर सड़क मार्ग का विकल्प देखा जा सकता है।
लेकिन यहां भी कुल किराया, यात्रा समय, सामान और कनेक्शन का अंतर जरूर जोड़ें।
सफर से पहले ये सावधानियां जरूरी
कनेक्टिंग रूट चुनते समय पहली और दूसरी यात्रा के बीच पर्याप्त समय रखें। त्योहार की भीड़ में बस या ट्रेन के देर होने की संभावना रहती है। रात में अनजान जगह पर लंबे समय तक इंतजार करने से बचें और टिकट केवल आधिकारिक या विश्वसनीय प्लेटफॉर्म से ही बुक करें।
छठ सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि घर लौटने की भावना है। कंफर्म टिकट न मिलने से इस सफर को रोकने की जरूरत नहीं है—बस रास्ता बदलना होगा। सही प्लानिंग के साथ दिल्ली से बिहार तक का सफर कई हिस्सों में बांटकर भी पूरा किया जा सकता है।
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