पूर्वी दिल्ली के सीमापुरी में चार मंजिला इमारत के अचानक ढहने से एक परिवार ही नहीं, पूरा इलाका सदमे में है। मलबे से लगातार शव और घायलों को निकालने के बीच एक गर्भवती महिला और उसकी तीन साल की बेटी की मौत ने हादसे को और दर्दनाक बना दिया।
अचानक भरभराकर गिर गई चार मंजिला इमारत
बुधवार दोपहर करीब 3:10 बजे सीमापुरी के ई-ब्लॉक में मछली मंडी और ईदगाह मस्जिद के पास चार मंजिला इमारत अचानक ढह गई। ग्राउंड फ्लोर पर दुकानें थीं, जबकि ऊपर की मंजिलों पर कई परिवार रहते थे।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल, एनडीआरएफ और आपदा राहत टीमें मौके पर पहुंचीं। गुरुवार सुबह मलबे से एक और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या चार हो गई।
4 महीने की गर्भवती गुल्फ़्शा और बेटी की मौत
हादसे में गुल्फ़्शा और उनकी तीन साल की बेटी जोया की भी मौत हो गई। बताया गया कि गुल्फ़्शा चार महीने की गर्भवती थीं और अपने माता-पिता से मिलने के लिए बेटी के साथ मायके आई थीं।
माता-पिता घर पर नहीं थे, इसलिए वह पड़ोसियों के साथ बैठकर उनका इंतजार कर रही थीं। हादसे से करीब 10 मिनट पहले उनकी बहन वहां से चली गई थी, लेकिन गुल्फ़्शा और जोया वहीं रह गईं।
मलबे के नीचे से किया फोन
इमारत गिरने के बाद गुल्फ़्शा मलबे में दब गई थीं। बताया गया कि उन्होंने हिम्मत जुटाकर एक रिश्तेदार को फोन किया और अपने मलबे में दबे होने की जानकारी दी।
बचाव दल ने शाम करीब 7:30 बजे तीन साल की जोया को मलबे से बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। करीब डेढ़ घंटे बाद गुल्फ़्शा को गंभीर हालत में निकाला गया। अस्पताल ले जाने के बाद उन्होंने भी दम तोड़ दिया।
संकरी गलियों ने बढ़ाई रेस्क्यू टीम की मुश्किल
घटनास्थल तक पहुंचने में बचाव दल को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। सीमापुरी की संकरी गलियों के कारण दमकल, एनडीआरएफ और एंबुलेंस की बड़ी गाड़ियां सीधे घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं।
मलबा हटाने के लिए आठ बुलडोजर और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए करीब 20 एंबुलेंस लगाई गईं। अधिकारियों के मुताबिक सात लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि आठ घायलों का इलाज अस्पताल में जारी है।
इमारत गिरने की वजह की जांच
शाहदरा के डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीना के मुताबिक पुलिस और राहत टीमों ने देर रात तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार इमारत के निर्माण मानकों और उसके अचानक ढहने के कारणों की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह स्पष्ट होगी।
दिल्ली में जर्जर इमारतों पर फिर सवाल
सीमापुरी हादसे ने दिल्ली में पुरानी और कमजोर इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इससे पहले 6 सितंबर 2026 को सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2022 से 2025 के बीच दिल्ली में इमारत ढहने की 1,133 घटनाएं दर्ज हुईं और इनमें 98 लोगों की जान गई। ये आंकड़े बताते हैं कि जर्जर इमारतों की पहचान, निर्माण मानकों की निगरानी और समय पर कार्रवाई कितनी जरूरी है।
सीमापुरी की घटना सिर्फ एक इमारत के गिरने की कहानी नहीं है। मलबे में दबे परिवारों के दर्द के साथ यह सवाल भी खड़ा है कि अगला हादसा रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां कब और कितनी सख्ती से कदम उठाएंगी।
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