तमिलनाडु के हर जिले में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने का मुद्दा केंद्र और राज्य के बीच मतभेद का कारण बना हुआ है। मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। राज्य सरकार का तर्क है कि नवोदय विद्यालयों की भाषा नीति उसकी मौजूदा शिक्षा नीति से अलग है।
सुनवाई में भाषा नीति पर हुई चर्चा
सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना ने राज्य सरकार से भाषा नीति को लेकर अपना रुख अधिक लचीला रखने और केंद्र के साथ बातचीत करने का सुझाव दिया। अदालत ने कहा कि यदि दूसरी भाषा से संबंधित बदलाव की जरूरत है तो उसका रास्ता बातचीत से निकाला जा सकता है। जुलाई 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को केंद्र के साथ परामर्श करने और नवोदय विद्यालयों के लिए जमीन उपलब्ध कराने के मुद्दे पर आगे बढ़ने को कहा था।
जमीन उपलब्ध कराने का मुद्दा भी अहम
मामले में केवल भाषा ही मुद्दा नहीं है। नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए प्रत्येक जिले में जमीन की जरूरत का विषय भी सुनवाई में आया। राज्य की ओर से बताया गया कि प्रत्येक जिले में लगभग 30 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। अदालत ने जमीन अधिग्रहण का निर्देश देने के बजाय उपयुक्त जमीन की पहचान और दोनों सरकारों के बीच बातचीत पर जोर दिया।
तमिलनाडु ने रखी अपनी नीति
राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता ने कहा कि तमिलनाडु की अपनी शिक्षा और भाषा नीति है और राज्य किसी केंद्रीय नीति को हर परिस्थिति में लागू करने के लिए बाध्य नहीं हो सकता। राज्य की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि मामले को संवैधानिक और संघीय ढांचे के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
सहकारी संघवाद पर सुप्रीम कोर्ट का जोर
सुनवाई में अदालत ने केंद्र और राज्य के बीच संवाद को महत्वपूर्ण बताया। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का केंद्र यह था कि शिक्षा और भाषा जैसे संवेदनशील विषयों पर टकराव के बजाय बातचीत से रास्ता निकाला जाए। अदालत ने दोनों पक्षों के सचिवों के बीच फिर बैठक करने का सुझाव दिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र की ओर से भी ऐसी बैठक के लिए सहमति जताई गई थी।
भाषा और शिक्षा के बीच संतुलन की बहस
यह विवाद केवल स्कूल खोलने तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में यह सवाल भी है कि राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा योजनाओं और राज्यों की अपनी भाषा नीतियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के एक फैसले में भी बच्चे की प्राथमिक स्तर पर शिक्षा के माध्यम को चुनने की स्वतंत्रता से जुड़े संवैधानिक पहलुओं पर चर्चा की गई थी।
अब बातचीत पर टिकी नजर
फिलहाल मामले में केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच प्रस्तावित बातचीत महत्वपूर्ण हो गई है। जमीन, नवोदय विद्यालयों की स्थापना और भाषा नीति से जुड़े मतभेदों पर दोनों पक्षों का रुख आगे की प्रक्रिया को प्रभावित करेगा। इस विवाद का अगला चरण अदालत की टिप्पणी के साथ-साथ केंद्र और राज्य के बीच होने वाली बातचीत से तय होगा।
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