मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रमों के बीच आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को लेकर एक आरोप सामने आया है। सौरव दास ने एक कथित संदेश के आधार पर दावा किया कि महिलाओं से कार्यक्रम में शामिल होने, दीया जलाने और सरकारी योजनाओं की तारीफ करते वीडियो बनाने को कहा गया।
सोशल मीडिया पोस्ट से उठा मामला
मामला 17 सितंबर को सामने आया, जब कॉकरोच जनता पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर काम करने वाली एक महिला की बेटी से उन्हें संदेश मिला है। पोस्ट में लगाए गए आरोप के मुताबिक, महिलाओं को प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन मनाने के लिए जुटने और दीया जलाने के निर्देश दिए गए।
सरकार की योजनाओं का प्रचार कराने का दावा
सौरव दास ने अपने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री और उनकी सरकार की योजनाओं की तारीफ करते हुए वीडियो रिकॉर्ड करने को कहा गया। उनके अनुसार, ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की धमकी दिए जाने की बात भी संदेश में कही गई थी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इस कथित संदेश की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित सरकारी विभाग की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों को फिलहाल दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश में चल रहा ‘सेवा संकल्प अभियान’
यह विवाद ऐसे समय उठा है जब मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन से ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया गया है। राज्य सरकार के अनुसार यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसकी शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से हो रही है, जिसके तहत गांवों और शहरी वार्डों में दीप प्रज्ज्वलन की योजना बनाई गई है।
आंगनवाड़ी केंद्रों से जुड़ी चुनौतियां
सौरव दास ने अपनी पोस्ट में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की कथित समस्याओं को भी मुद्दा बनाया। उन्होंने कम मानदेय, काम के दबाव, रिक्त पदों, सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी तथा जर्जर भवनों में संचालित केंद्रों का उल्लेख किया। देशभर में आंगनवाड़ी व्यवस्था बच्चों और माताओं के पोषण, स्वास्थ्य तथा शुरुआती शिक्षा से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
सरकारी कार्यक्रम और राजनीतिक सवाल
मध्य प्रदेश सरकार के आधिकारिक कार्यक्रमों में आंगनवाड़ी केंद्रों पर ‘आंगन मिलन सेवा’ आयोजित करने की भी योजना है। इसमें बच्चों और माताओं के लिए पोषण, स्वास्थ्य, टीकाकरण, एनीमिया और स्वच्छता से जुड़ी जानकारी देने की बात कही गई है। वहीं, सौरव दास का आरोप सरकारी कार्यक्रमों में कर्मचारियों की भागीदारी और राजनीतिक प्रचार के बीच अंतर को लेकर सवाल उठाता है।
असली सवाल अब पुष्टि का
पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को वीडियो बनाने और ऐसा नहीं करने पर कार्रवाई की धमकी देने संबंधी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोप और आधिकारिक तथ्य को अलग-अलग रखना जरूरी है। यदि संबंधित विभाग इस कथित निर्देश पर स्थिति स्पष्ट करता है, तो विवाद की तस्वीर और साफ हो सकती है।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता ग्रामीण और शहरी समाज की जमीनी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसलिए उनके काम, अधिकार और जिम्मेदारियों से जुड़ा कोई भी निर्देश केवल राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता का विषय भी बन जाता है।
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