राजस्थान के 3 हजार मदरसों पर हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से विस्तृत हलफनामा, 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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PEEYUSH UPADHYAY
पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव...
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राजस्थान के 3 हजार मदरसों पर हाईकोर्ट ने मांगा सरकार से विस्तृत हलफनामा, 27 अक्टूबर को अगली सुनवाई

राजस्थान में संचालित करीब 3 हजार मदरसों की शिक्षा और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण, संचालन और शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार के लिए अभी क्या कदम उठाए जा रहे हैं और आगे क्या प्रस्तावित है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।

प्रतिपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई

यह मामला प्रतिपाल सिंह और अन्य की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से मदरसों की शिक्षा व्यवस्था, प्रबंधन और निगरानी से संबंधित कई मुद्दे अदालत के सामने रखे गए।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोती सिंह ने दलील दी कि राजस्थान मदरसा बोर्ड अधिनियम, 2020 में मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रावधानों की जरूरत है। याचिका में योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और पारदर्शी प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी रखी गई।

सरकार से क्या जानकारी मांगी गई?

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण और संचालन को लेकर उठाए जा रहे कदमों का विस्तृत विवरण मांगा है। सरकार को हलफनामे के जरिए यह बताना होगा कि मौजूदा व्यवस्था में निगरानी और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं।

अदालत ने याचिकाकर्ता की ओर से सुझाए गए सुधारों पर भी विचार करने को कहा है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल अदालत ने इन सुझावों को स्वीकार करने का अंतिम आदेश नहीं दिया है, बल्कि सरकार का पक्ष और प्रस्तावित कदम जानने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।

याचिका में शिक्षा व्यवस्था को लेकर क्या सुझाव?

याचिका में मदरसों को लेकर कई सुझाव रखे गए हैं। इनमें RBSE और CBSE से संबद्ध माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर के संस्थानों की अलग सूची तैयार करने और शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप बनाने की बात कही गई है।

इसके अलावा मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले संस्थानों के पंजीकरण की समीक्षा, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम तथा समान परीक्षा व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया है।

डिजिटल रिकॉर्ड और यूनिक स्टूडेंट ID का प्रस्ताव

याचिका में मदरसा विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए विशेष पोर्टल बनाने का सुझाव भी दिया गया है। इसके तहत विद्यार्थियों को यूनिक स्टूडेंट आईडी देने की बात कही गई है, ताकि छात्रों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज और ट्रैक किया जा सके।

याचिका में शिक्षकों की योग्यता और नियुक्ति व्यवस्था की समीक्षा का मुद्दा भी उठाया गया है। वहीं, ऐसे संस्थानों की पहचान और समीक्षा का सुझाव दिया गया है जो निर्धारित शैक्षणिक मानकों को पूरा नहीं करते।

गैर-मुस्लिम बच्चों की शिक्षा का मुद्दा

याचिका में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिशों का हवाला देते हुए गैर-मुस्लिम बच्चों की शिक्षा से जुड़ा मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया है। याचिकाकर्ता ने ऐसे बच्चों को सामान्य विद्यालयों में शिक्षा उपलब्ध कराने और शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुरूप व्यवस्था करने का सुझाव दिया है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रखे गए सुझाव और दलीलें हैं। हाईकोर्ट ने इन सभी प्रस्तावों को अंतिम रूप से लागू करने का आदेश नहीं दिया है।

27 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई

अतिरिक्त महाधिवक्ता बीएल भाटी को राज्य सरकार की ओर से मदरसों के प्रभावी प्रबंधन और संचालन के लिए उठाए जा रहे तथा प्रस्तावित कदमों की जानकारी देते हुए विस्तृत हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब सरकार के जवाब के बाद अदालत मामले में आगे सुनवाई करेगी। 27 अक्टूबर की सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकता है कि राज्य सरकार मदरसा शिक्षा और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर किन सुधारों का प्रस्ताव अदालत के सामने रखती है।


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पीयुष उपाध्याय एक अनुभवी समाचार संपादक हैं, जो Aware Media Network के लिए देश-दुनिया की प्रमुख खबरों, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग सुनिश्चित करते हैं। उनका अनुभव पत्रकारिता में 7+ वर्षों का है और वे निष्पक्ष, भरोसेमंद और समय पर समाचार प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कई पुरस्कार और मान्यता प्राप्त की है, जिनमें 2022 में “Best Investigative Journalist” और 2021 में “Top 10 Editors in Uttarakhand” शामिल हैं।
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