तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश के बाद विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। राहुल गांधी के बाद अरविंद केजरीवाल और संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर ममता बनर्जी के पक्ष में अपनी बात रखी है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि यह अंतिम फैसला नहीं, बल्कि मौजूदा उपचुनावों के लिए अंतरिम व्यवस्था है।
चुनाव आयोग ने TMC के नाम और सिंबल पर लगाई रोक
17 सितंबर को चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम और उसके आरक्षित ‘Flowers & Grass’ चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी। आयोग के मुताबिक संगठन के भीतर ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दो प्रतिद्वंद्वी समूह सामने आए हैं और दोनों खुद को पार्टी का प्रतिनिधि बता रहे हैं।
आयोग ने दोनों गुटों से 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन पसंदीदा नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिन्ह के विकल्प देने को कहा है। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल के आगामी उपचुनावों तक लागू रहेगी और अंतिम निर्णय बाद में लिया जाएगा।
राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और BJP पर लगाए आरोप
फैसले के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए चुनाव आयोग और बीजेपी पर सवाल उठाए। उन्होंने TMC के मौजूदा विवाद को महाराष्ट्र में शिवसेना और NCP से जुड़े पुराने पार्टी-सिंबल विवादों के संदर्भ में रखा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर राजनीतिक दलों को तोड़ने और उनके चुनाव चिन्ह छीनने का काम कर रहे हैं। ये राहुल गांधी के आरोप हैं, जबकि चुनाव आयोग का आदेश अपने स्तर पर दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के दावे और आगामी उपचुनावों की समयसीमा को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था बताता है।
केजरीवाल भी ममता के समर्थन में
इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी राहुल गांधी के रुख का समर्थन किया है। TMC विवाद को लेकर उनकी प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब विपक्षी दलों के बीच चुनाव आयोग की भूमिका और राजनीतिक दलों में टूट से जुड़े मुद्दों पर बहस चल रही है।
हालांकि, केजरीवाल की प्रतिक्रिया और चुनाव आयोग के औपचारिक आदेश को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि दोनों पक्षों के दावों पर अंतिम निर्णय Election Symbols (Reservation and Allotment) Order, 1968 के पैरा 15 के तहत आगे की प्रक्रिया के बाद होगा।
संजय राउत ने शिवसेना और NCP विवाद का दिया उदाहरण
शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भी ममता बनर्जी के समर्थन में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने TMC के मामले की तुलना शिवसेना और NCP के पार्टी नियंत्रण और चुनाव चिन्ह से जुड़े विवादों से की।
राउत ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दलों को तोड़ने और चुनाव आयोग पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मूल पार्टी और उसके चुनाव चिन्ह को बरकरार रखा जाना चाहिए।
इन बयानों पर भी ध्यान देना जरूरी है कि ये संबंधित नेताओं के राजनीतिक आरोप और राय हैं; चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश में ऐसा कोई निष्कर्ष दर्ज नहीं है कि किसी राजनीतिक दल को तोड़ने के लिए आयोग ने कार्रवाई की है।
TMC विवाद की जड़ क्या है?
चुनाव आयोग के मुताबिक विवाद संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर है। आयोग के सामने दोनों पक्षों ने अपने-अपने दावे और दस्तावेज रखे। आयोग ने माना कि इस समय दो प्रतिद्वंद्वी समूह पार्टी पर दावा कर रहे हैं।
क्योंकि आगामी उपचुनावों के लिए चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और पूर्ण सुनवाई में समय लग सकता है, इसलिए आयोग ने फिलहाल दोनों गुटों को अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की है।
विपक्षी दलों के बीच समन्वय पर भी नजर
इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच DMK सांसद कनिमोझी की ममता बनर्जी समेत विभिन्न विपक्षी नेताओं से मुलाकातों की भी चर्चा है। परिसीमन और विपक्षी दलों के बीच समन्वय जैसे मुद्दे राष्ट्रीय राजनीति में पहले से चर्चा में हैं।
अब TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर चुनाव आयोग का अंतिम फैसला इस पूरे विवाद का अगला महत्वपूर्ण चरण होगा। फिलहाल आयोग की ओर से जारी व्यवस्था अंतरिम है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि अंतिम रूप से पार्टी का नाम और ‘Flowers & Grass’ चिन्ह किस पक्ष को मिलेगा।
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