एआईएडीएमके की सियासी बिसात पर हलचल तेज है। चर्चा है कि यदि पार्टी के 47 विधायकों में से दो-तिहाई, यानी कम से कम 32 सदस्य, एकजुट होकर नया गुट बना लें या किसी अन्य दल के साथ हाथ मिला लें, तो वे दल-बदल विरोधी कानून की जद से सुरक्षित बच सकते हैं।
फिलहाल, पार्टी के भीतर जारी इस खींचतान के बीच माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है। अब पूरी बाजी स्पीकर के पाले में है, जिनका आगामी फैसला न केवल एआईएडीएमके में शक्ति के संतुलन को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य के नेतृत्व की नई दिशा भी निर्धारित करेगा।
(आईएएनएस के इनपुट के साथ)
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