उनके मुताबिक, महिला आरक्षण विधेयक के जरिए बीजेपी नारी शक्ति के बीच विभाजन पैदा करना चाहती थी, जिसे विपक्ष की चट्टानी एकजुटता ने नाकाम कर दिया। उन्होंने तंज कसा कि भाजपा की राजनीति आज भी ‘पुरुष प्रधान सोच’ के इर्द-गिर्द सिमटी है, जबकि असली सशक्तीकरण के लिए सत्ता में महिलाओं की बराबर की हिस्सेदारी अनिवार्य है।
उन्होंने दावा किया कि देश में उमड़ रही नई जनचेतना और महिलाओं की बढ़ती जागरूकता जल्द ही सियासी समीकरणों को पलट कर रख देगी। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी की नीयत अब संदेह के घेरे में है और जागरूक महिलाएं इस ‘राजनीतिक प्रयोग’ की हकीकत को समझते हुए लोकतंत्र के जरिए करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
आईएएनएस के इनपुट के साथ
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