ईरान-अमेरिका शांति वार्ता: क्या इस्लामाबाद आएंगे डोनाल्ड ट्रंप? पाकिस्तान में युद्ध स्तर पर सुरक्षा तैयारी
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही शांति की ‘शतरंज’ में पाकिस्तान की भूमिका निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान ने पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि शांति समझौते पर इस्लामाबाद में हस्ताक्षर होते हैं, तो वे खुद वहां मौजूद रह सकते हैं। हालांकि, इस दौरे पर अभी आधिकारिक मुहर नहीं लगी है, लेकिन इस एक ‘संभावना’ ने ही कूटनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। सारा दारोमदार अब समझौते के अंतिम रूप लेने पर निर्भर है।
इस्लामाबाद-रावलपिंडी में अभेद्य किलेबंदी
ट्रंप के संभावित आगमन और इस हाई-प्रोफाइल वार्ता को देखते हुए पाकिस्तान प्रशासन ने सुरक्षा का ऐसा जाल बुना है जिसकी मिसाल नहीं मिलती। इस्लामाबाद और रावलपिंडी को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। वर्तमान में 10,000 से अधिक हथियाबंद पुलिसकर्मी सड़कों पर तैनात हैं और शहर भर में 600 से ज्यादा सुरक्षा चौकियां बनाई गई हैं।
नूर खान एयरबेस और इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों को रविवार आधी रात से पूरी तरह सील करने का फरमान जारी किया गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए ड्रोन उड़ाने, कबूतरबाजी और हवाई फायरिंग पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
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आम जनजीवन पर कड़ा पहरा
सुरक्षा प्रोटोकॉल के नाम पर रावलपिंडी में अघोषित लॉकडाउन जैसी स्थिति पैदा हो गई है। रेस्टोरेंट, जिम, ब्यूटी पार्लर, बैंक और बेकरियां अगली सूचना तक बंद कर दी गई हैं। प्रशासन ने सभी छात्र-छात्राओं के हॉस्टलों को भी बंद रखने के कड़े निर्देश दिए हैं।
संवेदनशील रास्तों पर रहने वाले नागरिकों को सख्त चेतावनी दी गई है कि वे अपनी बालकनी या खिड़कियों पर नजर न आएं, अन्यथा उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सभी गेस्ट हाउसों को पाबंद किया गया है कि वे अपने मेहमानों का डेटा हर दिन स्थानीय पुलिस स्टेशन में अनिवार्य रूप से जमा करें।
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शांति की आखिरी कोशिश: 22 अप्रैल की डेडलाइन
दुनिया की निगाहें इस वक्त पाकिस्तान की इस कूटनीतिक कसरत पर टिकी हैं। 11 और 12 अप्रैल को हुई पहले दौर की बातचीत भले ही बेनतीजा रही हो, लेकिन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की नई पहल ने उम्मीदें दोबारा जगाई हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा वर्तमान सीजफायर 22 अप्रैल को समाप्त होने वाला है। ऐसे में समय की सुई तेजी से भाग रही है, क्योंकि वैश्विक शांति के लिए इस समयसीमा से पहले एक ठोस नतीजे पर पहुंचना अनिवार्य है।
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