जमीन मापी की उलझनों को सुलझाने के लिए अब एक सख्त समय-सीमा तय कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि चाहे जमीन विवादित हो या अविवादित, अमीन को निर्धारित कार्य दिवसों के भीतर मापी की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद, आवेदन की तिथि से ठीक 14वें दिन मापी की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को आवश्यक मानव संसाधन और आधुनिक साधन तैनात करने को कहा गया है। साथ ही, पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर रखने के लिए एक मजबूत निगरानी प्रणाली स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी स्तर पर देरी न हो।
आम जनता की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए कुमार ने इन नए बदलावों पर 25 जनवरी तक फीडबैक मांगा है। नागरिक निर्धारित माध्यमों से अपनी प्रतिक्रियाएं और सुझाव साझा कर सकते हैं।
(पीटीआई के इनपुट के साथ)
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