रिपोर्ट जारी करते हुए राजीव गौड़ा ने तीखे लहजे में कहा, “अर्थव्यवस्था की मौजूदा तस्वीर मोदी सरकार की प्राथमिकताओं का कच्चा चिट्ठा खोलती है। एक ऐसे दौर में जब आर्थिक असमानता की खाई गहरी होती जा रही है और कॉर्पोरेट घराने रिकॉर्ड मुनाफा कूट रहे हैं, आम आदमी के लिए सार्थक रोजगार का अकाल पड़ा है। विडंबना यह है कि मोदी सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती करने पर आमादा है।”
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बयानों पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा, “यह सरकार गरीब, युवा, किसान और महिला—इन चारों ‘जातियों’ के सामाजिक सुरक्षा कवच को ही छिन्न-भिन्न कर रही है। यही नहीं, वैश्विक स्तर पर भारत के सरकारी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आज देश को खोखली सुर्खियों की नहीं, बल्कि ईमानदार आंकड़ों और एक ऐसे समावेशी विकास मॉडल की जरूरत है जो वास्तव में रोजगार पैदा करे। मोदी सरकार का यह शोर-शराबा हमें पूर्ववर्ती एनडीए सरकार के उसी ‘इंडिया शाइनिंग’ वाले अहंकार की याद दिलाता है, जो जमीनी हकीकत से कोसों दूर था।”
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