संविधान के समक्ष आरएसएस की भूमिका: कांग्रेस ने उठाए सवाल, पीएम-शाह पर लगाए आरोप
नई दिल्ली: कांग्रेस ने संविधान दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने और संविधान के मूल सिद्धांतों, प्रावधानों और प्रक्रियाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को कहा कि, “संविधान को अपनाए जाने के बाद से ही आरएसएस की भूमिका संविधान पर हमला करने और उसे कमजोर करने की रही है।”
संविधान दिवस पर ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट में, जयराम रमेश ने 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा की ऐतिहासिक बैठक का स्मरण किया। उन्होंने बताया कि कैसे डॉ. राजेंद्र प्रसाद की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा प्रस्तुत मसौदे को औपचारिक रूप से स्वीकार किया गया था।
रमेश ने संविधान सभा के सदस्यों, विशेष रूप से पंडित जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को रेखांकित किया, जिन्होंने उद्देश्य प्रस्ताव (Objectives Resolution) प्रस्तुत करने और विभिन्न समितियों के गठन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के अथक प्रयासों और समर्पण की भी सराहना की, जिन्हें संविधान सभा ने मसौदा समिति का अध्यक्ष बनाकर सबसे सही निर्णय बताया था।
जयराम रमेश ने तत्कालीन गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी के उस कथन का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने डॉ. अंबेडकर को संविधान निर्माण की जिम्मेदारी सौंपने में अपनी भूमिका को ‘अहिंसा की सबसे बड़ी विजय’ बताया था।
अपने निष्कर्ष में, कांग्रेस महासचिव ने स्पष्ट रूप से कहा, “यह सब भारत के संविधान निर्माण के इतिहास का हिस्सा है, जिसमें आरएसएस की कोई भूमिका नहीं थी। वास्तव में, संविधान अपनाए जाने के बाद आरएसएस की भूमिका संविधान पर हमला करने और उसे कमजोर करने की रही है। उसी भूमिका को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान प्रधानमंत्री और गृह मंत्री भी सुनियोजित तरीके से संविधान के सिद्धांतों, प्रावधानों और प्रक्रियाओं को कमजोर कर रहे हैं।”
यह बयान कांग्रेस के उस रुख को दर्शाता है जो संविधान और उसके मूल्यों की रक्षा को लेकर पार्टी की प्रतिबद्धता को उजागर करता है।
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