यदि दिल्ली की हवा का यह हाल बना रहा, तो यह उत्तर भारत के सबसे बड़े बाज़ार और आर्थिक केंद्र के रूप में अपनी पहचान खो देगी। विदेशी तो दूर, देश के पर्यटक भी यहाँ आने से कतराएंगे। दिल्ली से बड़े इवेंट्स, चाहे वे राजनीतिक, शैक्षिक, अकादमिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, साहित्यिक हों, सब दूर हो जाएंगे। ओलंपिक, कॉमनवेल्थ या एशियाड जैसी बड़ी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन तो दूर की बात है। यहाँ के होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी-कैब, गाइड, हस्तशिल्प व्यवसाय, और अन्य सभी आर्थिक-सामाजिक गतिविधियाँ ठप पड़ने की कगार पर पहुँच जाएँगी।
प्रदूषण के कारण जब हवाई जहाज नहीं उड़ पाएंगे, ट्रेनें घंटों लेट होंगी, और सड़क परिवहन भी असुरक्षित हो जाएगा, तो दिल्ली आने की जहमत कौन उठाएगा? आलम यह होगा कि लोग अपने बच्चों के विवाह संबंध तय करने से पहले दिल्ली की हवा-पानी का गंभीरता से विचार करेंगे।
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