बिहार में एसआईआर: मताधिकार पर उठे सवाल, निर्वाचन आयोग की सफाई
वर्ष 2003 के बाद पहली बार बिहार में एसआईआर (Special Summary Revision) की प्रक्रिया राजनीतिक गरमागरमी का कारण बनी है। विपक्षी दलों ने जहां इस प्रक्रिया को मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने की साजिश करार दिया है, वहीं निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करना और किसी भी अपात्र व्यक्ति को स्थान न देना है।
एसआईआर के प्रारंभिक निष्कर्षों ने बिहार में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या में महत्वपूर्ण कमी दर्शाई है। प्रक्रिया पूर्व 7.9 करोड़ की पंजीकृत मतदाता संख्या अब घटकर 7.24 करोड़ रह गई है, जिसने इस मुद्दे को और हवा दी है।
इस बीच, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली ने भी अपने विशेष सारांश संशोधन-2025 के परिणाम जारी किए हैं। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में कुल 1,55,24,858 पंजीकृत मतदाता हैं। इनमें 83,49,645 पुरुष, 71,73,952 महिला और 1,261 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। यह आंकड़ा बिहार में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, जो देश भर में मतदाता सूची की शुचिता और पहुंच पर चल रही बहस को एक नई दिशा दे रहा है।
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