जैसे ही यह मामला सामने आया, चुनाव आयोग के तेवर तल्ख हो गए। आयोग ने इसे न केवल घोर लापरवाही माना, बल्कि इसे निष्पक्षता के सिद्धांतों का उल्लंघन भी करार दिया। आनन-फानन में की गई जांच के बाद तीनों जवानों पर निलंबन की गाज गिरी है, साथ ही उनके विरुद्ध कठोर विभागीय कार्यवाही के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
गौरतलब है कि इससे पहले भी शिकायतों के आधार पर बीएसएफ के कुछ जवानों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा चुके हैं। सूत्रों का संकेत है कि आगामी विधानसभा चुनावों की संवेदनशीलता को देखते हुए, चुनाव आयोग केंद्रीय बलों की साख पर कोई भी दाग बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
आयोग का स्पष्ट मानना है कि किसी राजनीतिक दल के दफ्तर में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी उनकी पेशेवर गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यही वजह है कि इस प्रकरण में बिना किसी देरी के इतनी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
इस घटना के बाद जिले में तैनात अन्य सुरक्षाबलों को भी सख्त हिदायत दी गई है। चुनाव आयोग ने एक कड़ा संदेश दिया है कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान केंद्रीय बलों की किसी भी प्रकार की कोताही या पक्षपातपूर्ण आचरण को कतई सहन नहीं किया जाएगा।
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