केरल की अंतिम मतदाता सूची जारी: महिलाओं का दबदबा बरकरार, 1.38 करोड़ महिला मतदाताओं के साथ पुरुषों को पीछे छोड़ा। सूची में 2.23 लाख से अधिक प्रवासी भारतीयों को भी जगह मिली है।
केरल में लोकतंत्र के महापर्व की तैयारियां अब अपने निर्णायक पड़ाव पर हैं। राज्य में ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) प्रक्रिया के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद मतदाताओं की अंतिम सूची सार्वजनिक कर दी गई है, जिसमें कुल 2,69,53,644 मतदाताओं के नाम दर्ज हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू. केलकर के कार्यालय ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ गहन विमर्श के बाद ये आंकड़े पेश किए। इस अद्यतन सूची का आधिकारिक प्रकाशन 21 फरवरी को होगा, जो आगामी विधानसभा चुनावों के लिए चुनावी रणभेरी का आधार बनेगी।
निर्वाचन प्रक्रिया के सफर पर नजर डालें तो 23 दिसंबर को जारी प्रारूप (ड्राफ्ट) सूची में 2.54 करोड़ मतदाता थे। एसआईआर के पहले चरण में राज्य भर में 2.78 करोड़ फॉर्मों का वितरण किया गया, जिसके बाद गहन जांच, जनसुनवाई और संशोधनों के लंबे दौर ने मतदाताओं की संख्या को 2.69 करोड़ तक पहुंचा दिया। इस सूची की सबसे खास बात ‘नारी शक्ति’ का प्रभुत्व है; जहां राज्य में 1.38 करोड़ महिला मतदाता हैं, वहीं पुरुष मतदाताओं की संख्या 1.31 करोड़ है। इसके साथ ही, 2,23,558 प्रवासी (ओवरसीज) मतदाताओं की भागीदारी ने इस फेहरिस्त को और भी व्यापक बना दिया है।
सूची को त्रुटिहीन बनाने के लिए निर्वाचन विभाग ने स्वच्छता अभियान भी चलाया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, सभी 140 विधानसभा सीटों पर चली लंबी सुनवाई के बाद प्रारूप सूची से 53,229 नाम हटा दिए गए। इस छंटनी में वे नाम शामिल थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी, जिन्होंने विदेशी नागरिकता अपना ली थी, जो अन्यत्र प्रवास कर गए थे या जिनके नाम एक से अधिक बार दर्ज पाए गए थे। इस ‘फिल्ट्रेशन’ प्रक्रिया ने सूची की पारदर्शिता को नई ऊंचाई दी है।
शुद्धिकरण की यह प्रक्रिया कितनी विशाल थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आयोग ने विसंगतियों को दूर करने के लिए कुल 36,88,948 नोटिस जारी किए थे। अब इन सभी मामलों का सफलतापूर्वक निस्तारण कर लिया गया है। इनमें 19,32,688 मामले ‘नो मैपिंग’ श्रेणी के थे, जिनका मिलान 2002 की पुरानी सूची से नहीं हो पा रहा था, जबकि 17,56,260 रिकॉर्ड्स में स्थानीय स्तर की छोटी-बड़ी खामियां थीं, जिन्हें अब दुरुस्त कर लिया गया है।
लोकतंत्र के इस नए स्वरूप में युवाओं और प्रवासियों का भी उत्साह दिखा। पिछले साल 27 अक्टूबर से 30 जनवरी 2026 के बीच आयोग ने नाम जोड़ने के लिए आए 13,51,151 नए आवेदनों (फॉर्म-6) को अपनी स्वीकृति दी। इसके साथ ही, 1,59,111 प्रवासियों ने फॉर्म-6ए के जरिए पंजीकरण कराकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की। इसी समयावधि में नाम जोड़ने-हटाने के 24.28 लाख से अधिक आवेदनों पर कार्रवाई हुई, जबकि 3.93 लाख प्रविष्टियों में संशोधन किए गए। इस सशक्त और सटीक मतदाता सूची के साथ केरल अब विधानसभा चुनावों के महासंग्राम के लिए पूरी तरह तैयार है।
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