पूरक सूची पर चुनाव आयोग से भिड़ीं ममता बनर्जी, लगाया ‘लोकतंत्र की हत्या’ का गंभीर आरोप

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ममता ने पहली पूरक सूची प्रकाशित नहीं करने पर चुनाव आयोग पर साधा निशाना, लोकतंत्र की हत्या बताया

‘सुपर हिटलर’ से भी आगे निकली बीजेपी की रणनीति: ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर गरमाहट बढ़ गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची (एसआईआर कवायद) में पारदर्शिता की कमी को लेकर निर्वाचन आयोग और बीजेपी पर सीधा हमला बोला है। पहली पूरक सूची को पूरी तरह सार्वजनिक न करने को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार देते हुए ममता ने चेतावनी दी कि जनता सत्ता के इस मनमाने इस्तेमाल का जवाब जल्द ही देगी।

कोलकाता हवाई अड्डे पर पत्रकारों से मुखातिब होते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “ईश्वर के घर देर है, अंधेर नहीं। मैं यह बात रामनवमी के शुभ अवसर पर कह रही हूं।” ममता बनर्जी का यह बयान उस समय आया है जब आयोग मतदाताओं की दूसरी पूरक सूची प्रकाशित करने की तैयारी में है।

मुख्यमंत्री ने वर्तमान राजनीतिक हालात की तुलना तानाशाही के सबसे बुरे दौर से करते हुए कहा, “आज जो हो रहा है, वह ‘सुपर हिटलर’ के कारनामों को भी पीछे छोड़ देगा। यह पूरी कवायद अब बीजेपी की ‘वॉशिंग मशीन’ बन चुकी है, जहाँ लोकतंत्र और जन अधिकारों को बेरहमी से नष्ट किया जा रहा है।” उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम हटाकर किसी एक को बरकरार रखा जा रहा है। ममता ने सवाल उठाया, “एक खास समुदाय के लाखों नाम हटा दिए गए हैं। क्या बीजेपी खुद को इस देश का जमींदार समझने लगी है?”

उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए ममता बनर्जी ने आयोग को चुनौती दी कि वह पहली पूरक सूची का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करे। उन्होंने कुछ चौंकाने वाले उदाहरण देते हुए दावा किया कि मुर्शिदाबाद के सूती ब्लॉक में एक बूथ के 500 में से लगभग 400 मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। इसी तरह बसीरहाट के एक बूथ पर 600 में से 400 लोगों के नाम काट दिए गए।

बता दें कि 23 मार्च को ऑनलाइन जारी की गई ‘विचाराधीन’ नामों की पहली पूरक सूची में आधिकारिक तौर पर हटाए गए या जोड़े गए नामों की स्पष्ट संख्या नहीं दी गई थी। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, न्यायिक अधिकारियों द्वारा अब तक जाँचे गए 32 लाख मतदाताओं में से लगभग 40 प्रतिशत के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।


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