गोरखपुर: मुख्य न्यायाधीश गवई पर जूता फेंके जाने की घटना पर अधिवक्ताओं की तीखी प्रतिक्रिया
देश भर में इन दिनों भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर एक वकील द्वारा जूता फेंके जाने की घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। 72 वर्षीय वकील राकेश किशोर द्वारा की गई इस हरकत पर गोरखपुर के दीवानी कचहरी के अधिवक्ताओं ने वन इंडिया हिंदी से विशेष बातचीत में अपनी बेबाक राय रखी। विभिन्न विधाओं के अधिवक्ताओं ने इस घटना पर अपने विचार साझा किए, जिनकी प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:
“ऐसी घटनाएं कदापि नहीं होनी चाहिए”
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक नारायण धर दूबे ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा, “इस कृत्य की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम है। मैं इसका पुरजोर विरोध करता हूं। न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखना हम सभी, विशेषकर विधि से जुड़े लोगों की जिम्मेदारी है। जब तक हम न्यायपालिका की मर्यादा, स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखने में सहयोग करेंगे, तभी तक देश का लोकतंत्र सुरक्षित रहेगा।”
“मुख्य न्यायाधीश का बड़प्पन प्रशंसनीय”
उन्होंने आगे कहा, “मुख्य न्यायाधीश द्वारा उस वकील के दुर्व्यवहार के बावजूद कोई कार्रवाई न करना उनके बड़प्पन को दर्शाता है। उन्होंने एक बड़े का फर्ज निभाया है। हालांकि, इसे उनकी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। ऐसी घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए। न्यायपालिका की गरिमा ही न्याय सुनिश्चित करने की कुंजी है।”
“अधिवक्ता और न्यायाधीश की कोई जाति नहीं होती”
एडवोकेट अशोक नारायण धर दूबे ने इस बात पर जोर दिया, “अधिवक्ता और न्यायाधीश की कोई जाति नहीं होती। वे एक विधिक समाज का हिस्सा हैं। हम सब कानून के विद्यार्थी हैं और हमारा कर्तव्य लोगों को न्याय दिलाना है।”
“मर्यादा का विशेष ध्यान रखना होगा”
वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कुमार पांडेय ने भी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, “इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होनी चाहिए। हम समाज की समस्याओं को न्यायपालिका के समक्ष रखते हैं और संविधान की गरिमा बनाए रखने में हमारी अहम भूमिका होती है। न्यायपालिका में ऐसी घटना दुखद है। वकील के बिना कोर्ट अधूरा है, लेकिन मर्यादा का ध्यान रखना सर्वोपरि है। मेरा आग्रह है कि उच्च न्यायपालिका के अधिकारियों को सार्वजनिक बयानों से बचना चाहिए। न्यायाधीश का काम अपने कलम से बोलना होता है। जो हुआ वह गलत है, लेकिन यह भी विचारणीय है कि वकील ने ऐसा क्यों किया? भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, यही कामना है।”
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