बजट से कुछ महीने पहले जिस तरह मनरेगा को कमजोर करने की कोशिशें हुई हैं, उसने गरीब मजदूरों की कमर तोड़कर रख दी है। ऐसे हालात में इस बजट से कोई खास उम्मीद लगाना मुश्किल नजर आता है। अब देखना यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से देश के लिए क्या निकलता है और आम जनता की बुनियादी समस्याओं को कितनी तवज्जो दी जाती है।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि हम सालों से केवल खोखली उम्मीदों के सहारे बैठे हैं। फिर चाहे वह हर साल दो करोड़ नौकरियां हों, हर खाते में 15 लाख रुपये, काला धन की वापसी या बुलेट ट्रेन का वादा हो। उन्होंने तंज कसा कि देखते हैं आज फिर कौन सा नया ‘जुमला’ उछाला जाता है। भाजपा सरकार ने जब अपने पुराने वादे ही पूरे नहीं किए, तो इस बार भी उनसे कोई बड़ी उम्मीद रखना बेमानी है।
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