न्याय की गुहार: क्या छिप रहा है साध्वी की मौत का सच?
साध्वी के निधन के बाद अब पूरा संत समाज एकजुट होकर ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ करने की मांग पर अड़ गया है। संतों का कड़ा तर्क है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी पुख्ता सबूत के की जा रही बयानबाजी न केवल दिवंगत आत्मा का अपमान है, बल्कि यह समाज में वैमनस्य और भ्रम का जहर भी घोल रही है। उन्होंने ऐसी भ्रामक टिप्पणियों पर तत्काल कानूनी चाबुक चलाने की अपील की है। इसी बीच, साध्वी प्रेम बाईसा के समर्थक प्रेमराज चौधरी ने भी जांच की निष्पक्षता पर जोर दिया है। उन्होंने एक गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर घटना से ठीक पहले आश्रम के सीसीटीवी कैमरे क्यों हटा दिए गए? यह रहस्यमयी कदम सीधे तौर पर संदेह पैदा करता है और इसकी गहन तफ्तीश होनी अनिवार्य है।
एक बड़ा सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि चिकित्सकों की स्पष्ट सलाह के बावजूद परिजनों ने पोस्टमॉर्टम करवाने से इनकार क्यों कर दिया? क्या यह फैसला सही था या इसके पीछे कोई गहरा राज छिपा है? इस अनुत्तरित सवाल ने मामले को और भी पेचीदा बना दिया है।
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