बिहार के मोकामा से विधायक अनंत सिंह की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। दुलारचंद यादव हत्याकांड को लेकर बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अनंत सिंह और दूसरे आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए हैं। सरकार ने पटना हाई कोर्ट से मिली अनंत सिंह की जमानत रद्द करने की मांग भी की है।
यह मामला दुलारचंद यादव के पोते नीरज की याचिका पर सुनवाई से जुड़ा है। नीरज ने सुप्रीम कोर्ट में अनंत सिंह की जमानत को चुनौती दी है। इसी मामले में बिहार सरकार ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर अपना रुख साफ किया है। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि अनंत सिंह के खिलाफ अब तक कुल 62 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या हत्या की कोशिश अपहरण रंगदारी और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी बताया कि पुलिस अधिकारियों की जांच और निगरानी के बाद जनवरी 2026 में अनंत सिंह के साथ मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। यानी पुलिस इस मामले में जांच पूरी कर आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र पेश कर चुकी है।
दरअसल दुलारचंद यादव की मौत 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी। उस समय अनंत सिंह जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ रहे थे। चुनाव प्रचार के दौरान अनंत सिंह के समर्थकों और जनसुराज से जुड़े लोगों के बीच झड़प हुई थी। इसी हिंसक घटना में दुलारचंद यादव की जान चली गई थी। इसके बाद अनंत सिंह समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। मार्च 2026 में अनंत सिंह को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई थी।
इस पूरे मामले में अब राजनीतिक विवाद भी जुड़ गया है। 23 अक्टूबर को पटना स्नातक सीट पर हुए एमएलसी चुनाव में अनंत सिंह ने अपनी पार्टी के उम्मीदवार के बजाय जनसुराज के प्रत्याशी का समर्थन किया था। इसके बाद जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया।
अब सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार के सख्त रुख के बाद अनंत सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है इस पर सभी की नजर बनी हुई है।
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