अक्सर हम सोचते हैं कि फोन के बैकग्राउंड में चल रहे एप्स को बार-बार हटा देने से डिवाइस रॉकेट की तरह तेज चलेगा। लेकिन हकीकत में, टेक एक्सपर्ट्स की मानें तो यह आदत आपके फोन को सुपरफास्ट बनाने के बजाय उसकी रफ्तार को सुस्त कर सकती है।
स्मार्टफोन का सिस्टम है खुद ही ‘स्मार्ट’
असल में, एंड्रॉइड और iOS जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि वे बैकग्राउंड एप्स को खुद ही कुशलता से मैनेज कर लेते हैं। जब आप किसी एप से बाहर आते हैं, तो वह पूरी तरह बंद होने के बजाय ‘सस्पेंड मोड’ में चला जाता है। इस स्थिति में वह ना के बराबर RAM और बैटरी का इस्तेमाल करता है, ताकि दोबारा जरूरत पड़ने पर वह तुरंत ओपन हो सके।
बैटरी और प्रोसेसर पर बढ़ता है बोझ
अगर आप बार-बार एप स्विचर से सभी एप्स को ‘क्लियर’ कर देते हैं, तो अगली बार उन्हें खोलने पर फोन को पूरी प्रक्रिया फिर से दोहरानी पड़ती है। इससे प्रोसेसर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और बैटरी भी ज्यादा खर्च होती है। यही वजह है कि एप्स को बार-बार हटाना परफॉर्मेंस सुधारने के बजाय उसे कभी-कभी धीमा कर देता है।
किस स्थिति में क्लोज करना है सही?
बड़ी टेक कंपनियां सलाह देती हैं कि आपको केवल उन्हीं एप्स को बंद करना चाहिए जो ठीक से काम नहीं कर रहे हों या फ्रीज हो गए हों। बाकी एप्स को बैकग्राउंड में रहने देना ही समझदारी है। आपके फोन का सिस्टम इतना सक्षम है कि वह जरूरत पड़ने पर खुद ही RAM खाली कर देता है और अनुपयोगी एप्स को अपने आप क्लोज कर देता है।
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