
अयोध्या में बड़ा फेरबदल: राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, गोपाल राव को एंट्री से रोका
अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की आज की हाई-प्रोफाइल बैठक ने रामनगरी की हलचल तेज कर दी है। दोपहर 3 बजे से शुरू हुई इस अहम बैठक में सबसे बड़ा फैसला चंपत राय के इस्तीफे को लेकर आया, जिसे ट्रस्ट ने मंजूर कर लिया है। बेहद नाटकीय घटनाक्रम के बीच चंपत राय खुद इस बैठक में शामिल नहीं हुए। वहीं, बैठक स्थल पर उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई जब विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को अंदर जाने से रोक दिया गया। सूत्रों के अनुसार, गोपाल राव ने भीतर जाने का प्रयास किया, लेकिन ट्रस्ट के सदस्यों ने उन्हें बाहर जाने का निर्देश दे दिया, जिसके बाद उन्हें वहां से लौटना पड़ा।
अनिल मिश्रा की कुर्सी पर सस्पेंस: इस्तीफे को लेकर गहन मंथन
चंपत राय की विदाई के बाद अब सारा ध्यान अनिल मिश्रा पर टिक गया है। सूत्रों के मुताबिक, उनके इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट के सदस्यों के बीच लंबी चर्चा जारी है। एबीपी की रिपोर्ट के अनुसार, शाम साढ़े पांच बजे कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज इस बैठक में लिए गए बड़े फैसलों की आधिकारिक जानकारी साझा करेंगे। मंदिर के भविष्य और आंतरिक प्रबंधन से जुड़े इन महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए ट्रस्ट के तमाम दिग्गज अयोध्या पहुंच चुके हैं। सुरक्षा के लिहाज से पूरे परिसर को छावनी में बदल दिया गया है; बैरिकेडिंग और पुलिस बल की भारी तैनाती के बीच केवल अधिकृत वाहनों को ही प्रवेश दिया जा रहा है।
विवादों के साये में बैठक: मंदिर परिसर पहुंचे चंपत राय
भले ही चंपत राय आधिकारिक बैठक का हिस्सा नहीं बने, लेकिन वे राम मंदिर परिसर में मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि यह आपातकालीन बैठक मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद पैदा हुई स्थितियों को संभालने के लिए बुलाई गई है। ट्रस्ट के दो प्रमुख चेहरों—चंपत राय और अनिल मिश्रा—के इस्तीफों पर फैसला लेना इस बैठक का मुख्य एजेंडा माना जा रहा है, ताकि मंदिर की छवि पर आंच न आए।
निर्णायक मोड़ पर राम मंदिर ट्रस्ट: क्या बदलेगी पूरी व्यवस्था?
बैठक के भीतर से छनकर आ रही खबरों के अनुसार, सारा फोकस राम मंदिर के प्रशासनिक और वित्तीय ढांचे को पारदर्शी बनाने पर है। चढ़ावे के प्रबंधन में सामने आई खामियों और हालिया विवादों ने ट्रस्ट को अपनी कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका की भी बारीकी से समीक्षा की जा रही है। सबकी नजरें अब शाम के ऐलान पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि दुनिया के सबसे भव्य मंदिर का प्रबंधन अब किन हाथों में होगा और आगे की राह क्या होगी।
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