दिल्ली प्रदर्शन के बीच नहीं थमी मेट्रो की रफ्तार, सुप्रीम कोर्ट में DMRC का बड़ा खुलासा।

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दिल्ली प्रदर्शन के बीच नहीं थमी मेट्रो की रफ्तार, सुप्रीम कोर्ट में DMRC का बड़ा खुलासा।
Delhi Protests: दिल्ली में प्रदर्शन के दिन मेट्रो सेवाएं नहीं हुईं बंद, DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में दी जानकारी

Delhi Protests: प्रदर्शन के बीच थमी नहीं दिल्ली की रफ्तार, DMRC ने सुप्रीम कोर्ट में पेश किया आंकड़ों का ‘रिपोर्ट कार्ड’

राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान क्या वाकई मेट्रो की रफ्तार पर ब्रेक लगा था? इस सवाल का जवाब दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में दिया है। DMRC ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन वाले दिन भी दिल्ली की लाइफलाइन पूरी तरह ठप नहीं हुई थी, बल्कि नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा यात्रियों की सेवा में जुटा रहा।

85 प्रतिशत नेटवर्क पर दौड़ती रहीं ट्रेनें
DMRC ने देश की सर्वोच्च अदालत को बताया कि 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शनों के बावजूद मेट्रो नेटवर्क का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सामान्य रूप से संचालित हो रहा था। कुल 303 स्टेशनों में से केवल 45 स्टेशनों पर ही प्रवेश और निकास पर प्रतिबंध लगाया गया था, जो पूरे नेटवर्क का महज 15 प्रतिशत हिस्सा है। बाकी 258 स्टेशनों पर आवाजाही पूरी तरह सुचारू रही। हलफनामे में यह भी साफ किया गया कि ये पाबंदियां सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और उनके कड़े निर्देशों के आधार पर ही लागू की गई थीं।

सफर का गणित: 32 लाख यात्रियों ने की यात्रा
आंकड़ों की बात करें तो 10 अक्टूबर 2026 को पाबंदियों के बावजूद लगभग 32 लाख यात्रियों ने मेट्रो का सफर तय किया। हालांकि, सामान्य दिनों के मुकाबले यह संख्या कम रही। DMRC के मुताबिक, महीने के दूसरे शनिवार को आमतौर पर करीब 58 लाख लोग मेट्रो का उपयोग करते हैं।

यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के उस आदेश के जवाब में पेश किया गया है, जिसमें अदालत ने स्टेशनों को बंद करने और ट्रेनों को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर जवाब मांगा था।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: ‘पूरी तरह न रुके परिचालन’
मामले की सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार को विशेष निर्देश दिए थे। पीठ का कहना था कि यह सुनिश्चित किया जाए कि राजधानी आने वाली ट्रेनों और मेट्रो के परिचालन पर पूर्ण प्रतिबंध न लगे। इसी अनुपालन के तहत DMRC ने अदालत को आश्वस्त किया कि किसी भी स्तर पर सेवाएं न तो कम की गई थीं और न ही रद्द की गई थीं।

क्यों मचा था ये बवाल?
दरअसल, मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) और कुछ छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी थी, लेकिन सुरक्षा के मद्देनजर मेट्रो और ट्रेनों पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए थे, जिसे चुनौती देते हुए मामला सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंचा था।

DMRC ने अब यह स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों के कारण केवल चुनिंदा स्टेशनों पर प्रवेश और निकास सीमित किया गया था, ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।


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