National news(Awaremedia): राजनाथ सिंह का चीन को संदेश एक बार फिर चर्चा में है। रक्षा मंत्री ने हिंद प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों को लेकर भारत का रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि समुद्र में जहाजों की आवाजाही और आसमान में विमानों की उड़ान की आजादी हर देश का अधिकार है। भारत इस व्यवस्था का समर्थन किसी देश के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और सभी देशों के हितों को ध्यान में रखकर करता है।
राजनाथ सिंह ने दक्षिण चीन सागर का जिक्र करते हुए कहा कि इस इलाके में समुद्री रास्तों और हवाई उड़ानों की आजादी को लेकर कई तरह की चिंताएं सामने आती रही हैं। फिलीपींस और वियतनाम जैसे देशों के साथ चीन के समुद्री विवाद भी लंबे समय से चर्चा में हैं। ऐसे में भारत का कहना है कि सभी देशों को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए और किसी भी विवाद को इस तरह सुलझाना चाहिए जिससे क्षेत्र में शांति बनी रहे।
रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून से जुड़े समझौते यानी यूएनसीएलओएस का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समुद्र में आवाजाही और हवाई उड़ानों की आजादी का समर्थन करने के पीछे भारत का मकसद किसी देश को निशाना बनाना नहीं है। भारत चाहता है कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में सभी देशों के अधिकार सुरक्षित रहें और किसी को अपनी ताकत के दम पर दूसरों के हितों को नुकसान पहुंचाने का मौका न मिले।
इस दौरान राजनाथ सिंह ने भारत और आसियान देशों के युवाओं को भी बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की युवा आबादी मिलकर क्षेत्र के भविष्य को बेहतर बना सकती है। इसके लिए भारत ने डिफेंस यूथ ब्रिज बनाने का प्रस्ताव रखा है। इससे युवाओं के बीच संपर्क बढ़ाने डिजिटल तकनीक और रक्षा क्षेत्र में एक दूसरे की क्षमता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने आतंकवाद का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने आतंकवादी ढांचे के खिलाफ कार्रवाई करके आतंकवाद को समर्थन देने वालों के खिलाफ अपना इरादा साफ किया है। उन्होंने कहा कि भारत अपने सहयोगी देशों के साथ आतंकवाद से निपटने का अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ऐसा हिंद प्रशांत क्षेत्र चाहता है जहां शांति सुरक्षा और स्थिरता बनी रहे। उनका संदेश साफ था कि क्षेत्र में किसी भी देश की सुरक्षा और अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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