
रजनीश आनंद: पत्रकारिता के ढाई दशकों का अनुभवी चेहरा और सामाजिक सरोकारों की प्रखर आवाज
पत्रकारिता जगत में 25 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव रखने वाली रजनीश आनंद वर्तमान में ‘अवेयर मीडिया न्यूज़’ में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं. वे संस्थान के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल जैसे महत्वपूर्ण वर्टिकल्स के लिए कलम चलाती हैं. रजनीश की असली पहचान उनकी तथ्य-आधारित (Fact-based) रिपोर्टिंग, गहन रिसर्च और जटिल विषयों को आसान भाषा में समझाने वाले ‘एक्सप्लेनर’ लेखन से है.
उनकी लेखनी का फलक काफी विस्तृत है. राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास और महिला अधिकारों से लेकर इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों तक उनकी विशेष पकड़ है. रजनीश अक्सर उन मुद्दों को मुख्यधारा की बहस का हिस्सा बनाती हैं, जो समाज के हाशिये पर खड़े समुदायों से जुड़े होते हैं और जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. आम जनजीवन को प्रभावित करने वाले इन अनछुए पहलुओं पर लिखना उनकी विशेष रुचि है.
रजनीश आनंद का पेशेवर सफर कई प्रतिष्ठित फेलोशिप्स से समृद्ध रहा है. ‘इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप’ के जरिए उन्होंने झारखंड के चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम) में माहवारी स्वच्छता और महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चुनौतियों पर जमीनी रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार की मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण और सरकारी योजनाओं के धरातलीय प्रभाव का बारीकी से अध्ययन किया. वहीं, ‘सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप’ के माध्यम से उन्होंने बाल अधिकारों, सुरक्षा और शिक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर गहन शोधपरक लेखन किया है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और उनकी समकालीन चुनौतियों पर रजनीश का काम मील का पत्थर माना जाता है. उन्होंने जमीन, पहचान और परंपराओं से जुड़े आदिवासी अधिकारों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच के संतुलन यानी ‘एनर्जी ट्रांजिशन’ और ‘जस्ट ट्रांजिशन’ पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है. कोयला बेल्ट में रोजगार और सामाजिक बदलाव पर उनकी रिपोर्टिंग ने नीतिगत स्तर पर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं.
मूल रूप से इलाहाबाद विश्वविद्यालय की स्नातक रजनीश आनंद वर्तमान में रांची में रहकर अपनी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. उनके करियर की शुरुआत वर्ष 2000 में ‘झारखंड जागरण’ से हुई थी. इसके बाद उन्होंने अवेयर मीडिया न्यूज़, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण जैसे दिग्गज संस्थानों में अपनी प्रतिभा को साबित किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक और पाक्षिक स्वरूपों में लंबे समय तक कार्य करने के बाद, वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता के आधुनिक दौर में भी पूरी सक्रियता के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं.
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