अफगानिस्तान पर ड्रोन हमला: सच्चाई का ताना-बाना, पाक में तालिबान, और ट्रंप का हाथ

By
Aware Media Network
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी...
- News Desk
5 Min Read
अफगानिस्तान पर ड्रोन हमला: सच्चाई का ताना-बाना, पाक में तालिबान, और ट्रंप का हाथ
taliban extracted truth from pakistan trump hand behind drone attack on afghanistan

पाकिस्तान का कबूलनामा: क्या तालिबान ने भारत से भी बड़ा खेल कर दिया?

दुश्मन को सीधे तौर पर पराजित करना अक्सर आसान होता है, पर उसे अपनी गुप्त करतूतें उगलने पर मजबूर करना किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं। आज पाकिस्तान के साथ कुछ ऐसा ही हुआ। भारत के पास वो ताकत है कि पाकिस्तान को एक पल में नक्शे से मिटा दे, पर भारत भी आज तक पाकिस्तान से उसकी उन गोपनीय संधियों का सच नहीं उगलवा सका, जिनके दम पर वो अपनी धरती का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ करता आया है। मगर, तालिबान ने वो कर दिखाया, जो भारत के लिए एक सपना ही रहा।

इतिहास में पहली बार, पाकिस्तान ने लिखित रूप में स्वीकार किया है कि उसने अपनी ज़मीन एक विदेशी शक्ति को दूसरे देशों पर हमले करने के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दे रखी थी। इसका सीधा मतलब यह है कि पाकिस्तान अब सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक किराए का एयरबेस बन चुका है। यह सनसनीखेज खुलासा तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में तालिबान और पाकिस्तान के बीच चल रही बातचीत के दौरान हुआ। इस बातचीत का मुख्य एजेंडा सीजफायर डील, यानी युद्धविराम था।

तालिबान का दबाव और पाकिस्तान का कबूलनामा

पाकिस्तान किसी भी कीमत पर यह समझौता करना चाहता था, क्योंकि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के बढ़ते हमलों से पूरा मुल्क थर्रा चुका है। पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हर रोज़ धमाके हो रहे हैं, और चिंता की बात यह है कि पाकिस्तान की अपनी जनता तालिबान के साथ खड़ी नजर आ रही है। वे सरकार के बजाय कट्टरपंथियों के प्रति वफादारी दिखा रहे हैं। इसी नाजुक स्थिति का फायदा उठाते हुए, तालिबान ने पाकिस्तान से वह सच उगलवा लिया, जो भारत कभी नहीं कर सका।

अफगानिस्तान में हाल ही में हुए ड्रोन हमलों के पीछे कौन था? यह सवाल तालिबान ने पाकिस्तान से पूछा। पहले तो पाकिस्तान ने इससे बचने की कोशिश की, लेकिन जब तालिबान ने सीजफायर खत्म करने की धमकी दी, तो पाकिस्तान को सच उगलना पड़ा। पाकिस्तान ने माना कि ये हमले वो नहीं, बल्कि कोई ‘विदेशी देश’ कर रहा है। जब तालिबान ने उस देश का नाम पूछा, तो पाकिस्तान ने कहा कि वे नाम नहीं बता सकते, पर उनके बीच एक ‘गोपनीय संधि’ (Secret Deal) हुई है।

अमेरिका का हाथ या तालिबान का नया दांव?

यह पहला मौका है जब पाकिस्तान ने यह स्वीकार किया है कि उसके पास अमेरिका के साथ ऐसा समझौता है, जिसके तहत अमेरिकी ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल कर सकते हैं। अफगान मीडिया TOLOnews की रिपोर्ट के अनुसार, यह कबूलनामा तुर्की में हुई हालिया पाकिस्तान-अफगानिस्तान शांति वार्ता के दौरान सामने आया। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत में कहा कि वे इस समझौते को तोड़ नहीं सकते, क्योंकि वाशिंगटन को ड्रोन संचालन की अनुमति मिली हुई है।

अफगान वार्ताकारों ने पाकिस्तान से लिखित आश्वासन मांगा कि वह अमेरिकी ड्रोन को अपने हवाई क्षेत्र से अफगानिस्तान पर हमले की इजाजत नहीं देगा। शुरुआती दौर में पाकिस्तानी दल इस पर सहमत भी हुआ, पर बाद में इस्लामाबाद से निर्देश मिलने के बाद उनका रुख बदल गया। उन्होंने कहा कि उनके पास अमेरिकी ड्रोन पर नियंत्रण नहीं है और वे ISIS के खिलाफ कार्रवाई की गारंटी नहीं दे सकते। वहीं, अफगान पक्ष ने जोर देकर कहा कि TTP का मुद्दा पूरी तरह से पाकिस्तान का आंतरिक मामला है और काबुल अपनी धरती का इस्तेमाल किसी भी अन्य देश के खिलाफ नहीं होने देगा।

यह घटनाक्रम पाकिस्तान की विदेश नीति और उसकी कमजोरियों को उजागर करता है। जहाँ भारत के लिए यह एक अप्रत्यक्ष जीत के समान है, वहीं तालिबान का यह कदम भविष्य में अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों को किस दिशा में ले जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा।


Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates

Subscribe to get the latest posts sent to your email.

Share This Article
Follow:
Aware Media Network एक स्वतंत्र डिजिटल न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरें, विश्लेषण और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग पाठकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों, आधिकारिक आंकड़ों और पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों के आधार पर समाचार तैयार करती है।Aware Media Network का उद्देश्य निष्पक्ष, सटीक और समय पर जानकारी प्रदान करना है, ताकि पाठक जागरूक निर्णय ले सकें और समसामयिक घटनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकें।
कोई टिप्पणी नहीं

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *