सत्ता का टकराव: अमेरिका में सरकारी शटडाउन का तीसरा दिन, नौकरियों पर मंडराया खतरा!
वॉशिंगटन – अमेरिका में सरकारी शटडाउन अपने तीसरे दिन में प्रवेश कर चुका है, और सत्ताधारी रिपब्लिकन और विपक्षी डेमोक्रेट्स के बीच राजनीतिक गतिरोध और गहराता जा रहा है। इस बीच, व्हाइट हाउस ने गुरुवार को एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसके अनुसार यदि बजट पर यह विवाद लंबे समय तक खिंचा, तो हजारों संघीय कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
नौकरियों पर तलवार, छंटनी की तैयारी में जुटा प्रशासन
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव, कैरोलीन लेविट, ने बताया कि प्रशासन संभावित छंटनियों की तैयारी में जुटा हुआ है। बजट कार्यालय (OMB) और अन्य संबंधित एजेंसियां इस बात का आकलन कर रही हैं कि किन विभागों पर इस शटडाउन का सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा। लेविट ने इस स्थिति के लिए डेमोक्रेट्स को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए कहा, “अगर डेमोक्रेट्स ने सरकार को खुला रखने के लिए अपना समर्थन दिया होता, तो आज हम इस स्थिति का सामना नहीं कर रहे होते।” उन्होंने डेमोक्रेट्स पर स्वास्थ्य लाभों को लेकर राजनीति करने का भी आरोप लगाया, विशेषकर उन गैर-दस्तावेजी प्रवासियों के मामले में, जिनके लिए मेडिकेयर जैसी सुविधाओं को लेकर विवाद खड़ा हुआ है।
ट्रंप का ‘अभूतपूर्व अवसर’: बजट समीक्षा और ‘अमेरिका को फिर से महान’ बनाने का वादा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे OMB निदेशक, रस वॉट, से मुलाकात करेंगे और उन कार्यक्रमों की समीक्षा करेंगे, जिन्हें कटौती के लिए अनुशंसित किया गया है। सोशल मीडिया पर ट्रंप ने इस गतिरोध को एक “अभूतपूर्व अवसर” बताया और कहा कि डेमोक्रेट्स ने उन्हें संघीय सरकार को एक नया रूप देने का मौका दिया है। उन्होंने व्यंग्य भरे अंदाज में लिखा, “शायद यही उनका तरीका है, अमेरिका को जल्दी और चुपचाप फिर से महान बनाने का।”
डेमोक्रेटिक राज्यों की परियोजनाओं पर भी रोक!
इस बीच, प्रशासन ने डेमोक्रेटिक राज्यों में चल रही अरबों डॉलर की परियोजनाओं की फंडिंग को रोकने या स्थगित करने का भी फैसला किया है।
कांग्रेस में गतिरोध: भविष्य अनिश्चित, जिम्मेदारियों की जंग जारी
कांग्रेस में बजट की समयसीमा पार होने के बाद से कई विभागों का बजट रुका हुआ है, हालांकि आवश्यक सेवाएं फिलहाल जारी हैं। रिपब्लिकन चाहते हैं कि मौजूदा फंडिंग को अगले सात हफ्तों के लिए बढ़ा दिया जाए, जबकि डेमोक्रेट्स नए फंडिंग उपाय का समर्थन करने से पहले बड़े राजनीतिक समझौते की मांग कर रहे हैं।
दोनों पक्ष इस गतिरोध के लिए एक-दूसरे को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। विशेषज्ञों की मानें तो यदि जल्द कोई समाधान नहीं निकला, तो न केवल सरकारी कामकाज बुरी तरह प्रभावित होगा, बल्कि हजारों कर्मचारियों की आजीविका पर भी गहरा संकट मंडरा सकता है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.
