हूती नेता का बड़ा दावा: फ़िलिस्तीन प्रेम और प्रभाव के कारण अमेरिका-इज़राइल के निशाने पर थे दिवंगत ईरानी नेता
एक हूती अधिकारी ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता, दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई की फ़िलिस्तीनी मुद्दे के प्रति अटूट निष्ठा और मुस्लिम जगत में उनके व्यापक प्रभाव ने ही उन्हें अमेरिका और इज़राइल की हत्या की साजिशों का मुख्य निशाना बनाया। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी IRNA के अनुसार, हूती संगठन ‘अंसारुल्लाह’ के राजनीतिक ब्यूरो सदस्य मोहम्मद अल-बुखैती ने तेहरान में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह के दौरान एक विशेष साक्षात्कार में यह बात कही। अल-बुखैती ने जोर देकर कहा कि अयातुल्ला खामेनेई का कद ईरान की भौगोलिक सीमाओं से कहीं ऊंचा था; वे उन तमाम देशों के लिए ‘आज़ादी और प्रतिरोध के वैश्विक प्रतीक’ थे जो अमेरिका और इज़राइल के वर्चस्व से मुक्ति और सम्मान की तलाश में हैं।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, “वे आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।” IRNA की रिपोर्ट के मुताबिक, हूती अधिकारी ने स्पष्ट रूप से कहा कि दिवंगत नेता की प्रखर राजनीतिक सोच और फ़िलिस्तीन की स्वतंत्रता के लिए उनके निरंतर प्रयास ही वे मुख्य कारण थे, जिसकी वजह से अमेरिका और इज़राइल ने उनकी हत्या की योजना बनाई।
दूसरी ओर, ईरान के सरकारी ब्रॉडकास्टर ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई की अंतिम विदाई का सिलसिला सोमवार सुबह तेहरान की सड़कों पर शुरू हुआ। जनसैलाब को देखते हुए अनुमान है कि यह जुलूस करीब 10 से 12 घंटे तक चलेगा, जिसे देश के आधुनिक इतिहास का ‘सबसे बड़ा मानवीय जमावड़ा’ माना जा रहा है। प्रेस टीवी ने बताया कि यह ऐतिहासिक यात्रा सुबह 6 बजे तेहरान के ग्रैंड मोसाल्ला धार्मिक परिसर से शुरू हुई, जहाँ पिछले दो दिनों से पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था।
आयोजकों के मुताबिक, शोक मनाने वालों की भारी भीड़ के बीच यह जुलूस 10 किलोमीटर लंबे मार्ग से होकर गुजरेगा, जिसमें दमावंद स्ट्रीट, इमाम हुसैन स्क्वायर, एनकेलाब स्क्वायर और आज़ादी स्क्वायर जैसे प्रमुख स्थल शामिल हैं। यह यात्रा मेहराबाद एयरपोर्ट के निकट शहीद लशगारी हाईवे पर संपन्न होगी। अंतिम संस्कार की मुख्य प्रार्थनाओं का नेतृत्व ग्रैंड अयातुल्ला जाफ़र सोभानी ने किया, जिसमें शहीद नेता के साथ उनके दामाद डॉ. मेस्बाह-उल-होदा बाघेरी-कानी, बेटी ज़हरा हद्दाद-आदिल और नन्हीं पोती ज़हरा मोहम्मदी-गोलपायगानी सहित परिवार के अन्य सदस्यों को भी अंतिम विदाई दी गई।
प्रेस टीवी की रिपोर्ट बताती है कि अंतिम संस्कार की यह धार्मिक रस्में मंगलवार को पवित्र शहर कोम में जारी रहेंगी। इसके बाद बुधवार को उनके पार्थिव शरीर को इराक के नजफ़ में इमाम अली (AS) और कर्बला में इमाम हुसैन (AS) के पवित्र स्थलों पर ले जाया जाएगा, जहाँ विशाल जुलूस निकाले जाएंगे।
दिवंगत नेता की अंतिम वसीयत के अनुरूप, उन्हें गुरुवार, 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रज़ा (AS) के पवित्र स्थल के प्रांगण में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। प्रेस टीवी के अनुसार, इस दुखद घड़ी में संवेदना व्यक्त करने के लिए शुक्रवार को भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान, इराक और तुर्की सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुँचा, जहाँ उन्होंने दिवंगत नेता को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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