इंडोनेशिया: इस्लामिक बोर्डिंग स्कूल का मलबा, 91 किशोरों की जान का सवाल, तीन की मौत
इंडोनेशिया में पूर्वी जावा के सिदोअर्जो शहर में स्थित अल ख़ज़िनी इस्लामिक बोर्डिंग स्कूल की इमारत ढहने से मातम पसरा हुआ है। मंगलवार देर शाम तक, तीन किशोरों के शव मलबे से निकाले जा चुके थे, लेकिन 91 अन्य छात्र अभी भी कंक्रीट के विशाल स्लैब के नीचे फंसे हुए हैं, जिनकी बेसब्री से तलाश जारी है। बचाव दल ने मलबे के नीचे जीवन के संकेत मिलने की उम्मीद जताई है।
यह दर्दनाक हादसा तब हुआ जब लगभग 100 साल पुरानी, अनधिकृत निर्माण कार्य वाली यह इमारत दोपहर की नमाज़ के दौरान ढह गई। स्कूल में उस समय 99 छात्र और कर्मचारी मौजूद थे, जिनमें से 91 लापता बताए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार, चौथी मंजिल पर चल रहे नए निर्माण कार्य के भार को नींव के खंभे सहन नहीं कर सके, जिसके कारण यह भयावह दुर्घटना हुई।
300 से अधिक बचावकर्मी, पुलिस और सैन्यकर्मी पिछले दो दिनों से राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निर्माण कार्य पिछले नौ महीनों से चल रहा था।
इंडोनेशिया में यह पहली बार नहीं है जब भवन सुरक्षा को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। ढीले निर्माण मानकों के कारण यहां अक्सर ऐसी घटनाएं होती हैं, जहां अधूरे निर्माण को बाद में अतिरिक्त मंजिलों के साथ पूरा किया जाता है। इसी महीने की शुरुआत में पश्चिम जावा में एक प्रार्थना सभा भवन ढहने से तीन लोगों की मौत हुई थी। 2018 में सिरेबोन में एक इमारत ढहने से सात किशोरों की जान चली गई थी, और उसी वर्ष जकार्ता में इंडोनेशिया के स्टॉक एक्सचेंज भवन की मेजेनाइन मंजिल गिरने से 75 लोग घायल हुए थे।
अधिकारियों ने सुरक्षा मानकों को कड़ा करने और भवन प्रबंधकों से निर्माण प्रक्रियाओं की अधिक सावधानीपूर्वक निगरानी करने का आग्रह किया है, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को दोहराया न जा सके।
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