लंबे समय में, ये अति-सूक्ष्म (अल्ट्राफाइन) कण रक्त के जरिए शरीर में समाकर कैंसर, हृदय रोग और मानसिक विकारों जैसी जानलेवा व्याधियों का आधार बनते हैं। प्रदूषकों का जल स्रोतों में मिलना न केवल पानी, बल्कि जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए भी बड़ा खतरा है। ‘काली बारिश’ से गिरने वाले रासायनिक यौगिक इमारतों और सड़कों पर जम जाते हैं, जो हवा के झोंकों के साथ दोबारा सांसों के रास्ते शरीर में प्रवेश कर सकते हैं।
सुरक्षा की दृष्टि से विशेषज्ञों ने स्थानीय लोगों को मास्क पहनने, घरों में रहने और खिड़की-दरवाजों को पूरी तरह बंद रखने की सलाह दी है, ताकि दूषित हवा भीतर न आ सके। इसके अलावा, जमा धूल और सतहों की नियमित सफाई भी अत्यंत आवश्यक है। विडंबना यह है कि युद्ध की विभीषिका के बीच इन सावधानियों को व्यवहार में लाना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


