हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की शर्त मंजूर? अमेरिका के मानते ही 2 दिन में बहाल होगी जहाजों की आवाजाही

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की शर्त मंजूर? अमेरिका के मानते ही 2 दिन में बहाल होगी जहाजों की आवाजाही
Iran की शर्तें US ने मानी तो 2 दिन में बहाल होगा Strait of Hormuz पर जहाजों का आवागमन

होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए ईरान का बड़ा दांव: अमेरिका के सामने रखीं ये शर्तें, कतर करा रहा है मध्यस्थता

पश्चिम एशिया में सुलगती तनाव की आग के बीच एक बेहद अहम कूटनीतिक हलचल सामने आई है। ईरान ने दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्ग—’होर्मुज स्ट्रेट’ (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को फिर से यातायात के लिए खोलने के वास्ते अमेरिका के सामने कई शर्तें रख दी हैं। तेहरान का दावा है कि यदि वॉशिंगटन इन मांगों को मान लेता है, तो इस रणनीतिक जलडमरूमध्य पर जहाजों की आवाजाही महज 2 दिनों के भीतर पूरी तरह बहाल की जा सकती है। इस नाजुक मुद्दे पर कतर की मध्यस्थता से दोनों धुर विरोधियों के बीच कूटनीतिक बातचीत का दौर जारी है। दिलचस्प बात यह है कि पहले ईरान ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए 5 दिन का वक्त मांगा था, जिसे अब घटाकर सिर्फ 48 घंटे (2 दिन) कर दिया गया है।

खाड़ी मामलों के प्रसिद्ध मीडिया संस्थान ‘अल जजीरा’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने खुलासा किया है कि कतर के मध्यस्थों ने ही इस प्रस्ताव को लागू करने की समयसीमा को 5 दिन से घटाने का सुझाव दिया था। विचार-विमर्श के बाद ईरान ने इसे 2 दिन करने पर सहमति जताई है। प्रमुख समाचार एजेंसी ‘एएनआई’ के अनुसार, अराघची ने स्पष्ट किया है कि यह कम समयसीमा तभी प्रभावी होगी जब अमेरिका ईरान की सभी शर्तों को पूरा करने के लिए अपनी रजामंदी दे देगा।

आखिर ईरान की वे कौन सी मांगें हैं, जिन पर पेच फंसा हुआ है? तेहरान की शर्तों में इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन के बाद अमेरिका द्वारा थोपे गए तमाम प्रतिबंधों को हटाना, इस संवेदनशील क्षेत्र से अमेरिकी सैन्य बलों की मौजूदगी को कम करना, ईरानी तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों से राहत देना और विदेशों (खास तौर पर कतर) के बैंकों में रोकी गई भारी-भरकम ईरानी धनराशि को तुरंत रिलीज करना शामिल है।

इन आर्थिक और सैन्य शर्तों के अलावा, तेहरान यह भी चाहता है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए ओमान के साथ मिलकर तय किए गए नए समुद्री मार्ग को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाए। ईरान की जिद है कि पुराने या अन्य सभी रास्तों को बंद कर दिया जाए और भविष्य में सारा समुद्री यातायात सिर्फ उसके द्वारा प्रस्तावित नए मार्ग से ही संचालित हो। विदेश मंत्री अराघची का मानना है कि यदि इन शर्तों के साथ इस रास्ते को खोला जाता है, तो इससे अमेरिका के साथ अन्य लंबित विवादों को सुलझाने के लिए भी बातचीत के दरवाजे खुल सकते हैं।

इससे पहले, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने दो टूक शब्दों में कहा था कि जब तक तेहरान की कुल 7 शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत नहीं होगी और होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद रहेगा। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक तीखी पोस्ट में उन्होंने कहा था कि यदि ईरान की शर्तें मान ली जाती हैं, तो कूटनीतिक संवाद का रास्ता प्रशस्त हो सकता है। साथ ही, उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि यदि ईरान पर कोई नया सैन्य हमला हुआ, तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

मोहसेन रेजाई की इन मांगों में सभी मोर्चों पर तत्काल युद्धविराम भी शामिल है। उन्होंने विशेष रूप से लेबनान में इजरायली सैन्य हमलों को तुरंत रोकने पर सबसे अधिक जोर दिया है। ईरान का यह स्पष्ट मानना है कि इस पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित किए बिना केवल अमेरिका के साथ द्विपक्षीय समझौता करना नाकाफी होगा।

गौरतलब है कि मौजूदा संकट के इस दौर में कतर दोनों देशों के बीच सेतु की भूमिका निभा रहा है। कतर ही लगातार दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कर बातचीत को आगे बढ़ा रहा है। इसी कूटनीतिक कड़ी के तहत, अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का एक गोपनीय पत्र कतर के मध्यस्थों के मार्फत मोहसेन रेजाई तक पहुंचाया गया है। रेजाई ने इस खत में अमेरिकी रुख के बदले हुए तेवरों को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा है। ईरान के सरकारी प्रसारणकर्ता ‘आईआरआईबी’ के मुताबिक, उन्होंने इसे रेखांकित करते हुए कहा कि अमेरिका के बातचीत के अंदाज में आया यह बदलाव सीधे तौर पर ईरानी जनता की दृढ़ता और जीत का प्रतीक है।

आपको बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम और व्यस्त समुद्री तेल मार्गों में शुमार है। फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला यह जलमार्ग वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल और गैस की आपूर्ति की रीढ़ माना जाता है। इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम आसमान छू सकते हैं और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में, ईरान की ये नई शर्तें और अमेरिका का अगला कदम क्या होगा, इस पर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं।


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