नेतन्याहू की हुंकार: ईरान की घेराबंदी के लिए इज़रायल और अमेरिका ने मिलाया हाथ, हिज़्बुल्लाह के खिलाफ जंग हुई तेज़
मिडिल ईस्ट में गहराते बारूदी संकट के बीच इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक बड़ा बयान देते हुए स्पष्ट किया है कि ईरान की चुनौती से निपटने के लिए इज़रायल और अमेरिका के इरादे पूरी तरह एक हैं। नेतन्याहू ने ज़ोर देकर कहा कि भले ही एक नाज़ुक संघर्ष-विराम के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मँडरा रहे हों, लेकिन दोनों देश साझा लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं। इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य मकसद ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर लगाम लगाना और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। नेतन्याहू ने खुलासा किया कि तेहरान के साथ होने वाले कूटनीतिक संपर्कों को लेकर वॉशिंगटन लगातार इज़रायल को भरोसे में ले रहा है। उन्होंने कहा, “हमारे और अमेरिका के लक्ष्य स्पष्ट हैं: हम चाहते हैं कि ईरान के पास से संवर्धित सामग्री हटा दी जाए, उसकी संवर्धन क्षमताओं को पूरी तरह खत्म किया जाए और समुद्री जलडमरूमध्य आवाजाही के लिए खुले रहें।”
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नेतन्याहू ने इस बात को स्वीकार किया कि फिलहाल स्थिति काफी पेचीदा बनी हुई है, खासकर तब जब ईरान और अमेरिका-इज़रायल गठबंधन के बीच जारी दो हफ्ते का अस्थायी संघर्ष-विराम 22 अप्रैल को खत्म होने जा रहा है। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों पर कहा कि अभी यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि यह ऊँट किस करवट बैठेगा या घटनाक्रम किस दिशा में मुड़ेगा। हालांकि, उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं और युद्ध दोबारा शुरू होता है, तो इज़रायल हर मुमकिन स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।
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हिज़्बुल्लाह के गढ़ में इज़रायली सेना का प्रचंड प्रहार
ईरान के साथ तनाव के बीच, इज़रायल की उत्तरी सीमा भी पूरी तरह सुलग रही है। यहाँ इज़रायली सुरक्षा बलों (IDF) और हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों के बीच भीषण संघर्ष जारी है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि उनकी सेना आतंकवादियों के ठिकानों को चुन-चुनकर निशाना बना रही है, जबकि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “मैं उत्तरी इज़रायल के उन जांबाज निवासियों के साथ मजबूती से खड़ा हूँ जो डटे हुए हैं।” नेतन्याहू ने विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान के ‘बिंत जबील’ शहर में चल रहे सैन्य अभियान का ज़िक्र किया, जो साल 2006 के युद्ध के बाद से ही हिज़्बुल्लाह का एक अहम रणनीतिक केंद्र रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि इज़रायली सेना इस महत्वपूर्ण इलाके पर पूरी तरह कब्ज़ा करने के बेहद करीब है। इसके अलावा, नेतन्याहू ने सुरक्षा घेरे को बढ़ाते हुए इसे माउंट हर्मोन की ढलानों तक ले जाने का निर्देश दिया है, ताकि संकटग्रस्त द्रूज़ समुदायों को आवश्यक सुरक्षा और मानवीय मदद पहुँचाई जा सके।
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