सुप्रीम कोर्ट में गरमागरम बहस: क्या “आयात को विनियमित करना” का मतलब टैरिफ लगाना है?
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान, जस्टिस एमी कोनी बैरेट ने अमेरिकी सॉलिसिटर जनरल के तर्कों पर गहरी असहमति जताई। सॉलिसिटर जनरल ने एक तर्क पेश किया, जिसके जवाब में जस्टिस बैरेट ने एक तीखा सवाल दागा: “क्या आप संहिता में ऐसे किसी दूसरे स्थान या इतिहास में किसी दूसरे समय का जिक्र कर सकते हैं, जहां ‘आयात को विनियमित करना’ वाक्यांश का उपयोग टैरिफ लगाने का अधिकार देने के लिए किया गया हो?” यह प्रश्न सीधे तौर पर उस व्याख्या पर सवाल उठाता है जिसके आधार पर राष्ट्रपति को आयात पर टैरिफ लगाने का अधिकार प्राप्त है।
इसके अतिरिक्त, जस्टिस बैरेट ने इस संभावना पर भी प्रकाश डाला कि यदि कांग्रेस भविष्य में आपातकालीन टैरिफ लगाने की शक्ति पर कोई सीमाएं तय करना चाहती है, तो उसे राष्ट्रपति के वीटो को दरकिनार करने के लिए एक महत्वपूर्ण दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। उन्होंने एक चिंताजनक परिदृश्य पेश करते हुए कहा, “अगर कांग्रेस कहती है, ‘अरे, हमें यह पसंद नहीं है, इससे राष्ट्रपति को आईईईपीए के तहत बहुत ज्यादा अधिकार मिल जाते हैं,’ तो उसे आईईईपीए से उस टैरिफ शक्ति को वापस लेने में बहुत मुश्किल होगी, है ना?” इस सवाल से यह स्पष्ट होता है कि वर्तमान कानून में मौजूद शक्तियों को वापस लेना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में अंतिम फैसला अभी आना बाकी है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के टैरिफ संबंधी फैसलों पर इस सुनवाई के माध्यम से अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने निश्चित रूप से महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला राष्ट्रपति की कार्यकारी शक्तियों की सीमा और कांग्रेस की विधायी निगरानी की प्रभावशीलता पर एक गहन बहस की ओर इशारा करता है।
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