“सत श्री अकाल, राम-राम सारे भाइयों को,” कनाडा से फतेह पुर्तगाल का यह उद्घोष उन सभी के कानों तक पहुँच गया जो अपराध की दुनिया के इस नए अध्याय से जुड़े थे। वह सीधे तौर पर उन लोगों को चुनौती दे रहा था जो लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी ढिल्लों के नाम का इस्तेमाल कर कनाडा की धरती पर वसूली और फायरिंग जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे थे। “अब उनकी जिम्मेदारी हम लेंगे,” फतेह का यह बयान किसी चेतावनी से कम नहीं था।
उसने स्पष्ट किया कि नवी तेसी द्वारा की गई वसूली ही उन ठिकानों को निशाना बनाने का कारण बनी थी, जिन्हें खामखां बदनाम किया गया। फतेह पुर्तगाल की चेतावनी और भी तीखी थी: “अगर आगे किसी व्यापारी की जान या व्यापार को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित लोगों की होगी, न कि गैंग की।” यह बात साफ कर दी गई थी कि अपराध के इस खेल में अब नई चालें चली जाएंगी।
यह सब तब हो रहा था जब लॉरेंस बिश्नोई को कनाडा में आतंकवादी घोषित किया गया था, एक ऐसा घटनाक्रम जिसने दुनिया भर में अपराध जगत की तस्वीर को और धुंधला कर दिया था। अपने बयान के अंत में, फतेह पुर्तगाल ने एक दार्शनिक स्पर्श जोड़ा, “शायद हमारा तरीका गलत लगे, लेकिन हमारा इरादा गलत नहीं है।” यह एक ऐसा वाक्य था जो शायद कई सवाल खड़े कर गया, लेकिन यह निश्चित रूप से इस नई कहानी में एक अहम मोड़ साबित हुआ।
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