Nepal Flood Disaster: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने सिर्फ सैकड़ों परिवारों को उजाड़ा नहीं, बल्कि हिमालयी नदियों और सीमा पार जल परियोजनाओं को लेकर भारत की पुरानी चिंताओं को भी फिर सामने ला दिया है। अब सवाल सिर्फ तबाही का नहीं, बल्कि समय पर चेतावनी और भविष्य की सुरक्षा का है।
नेपाल में जलप्रलय से मचा हाहाकार
नेपाल में भोटे कोशी नदी के उफान ने भारी तबाही मचाई है। उपलब्ध विवरणों के मुताबिक, 162 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 750 से अधिक लोग लापता हैं। इनमें 133 भारतीयों के शामिल होने की बात कही गई है। कई घर, सड़कें और बिजली परियोजनाएं बाढ़ की चपेट में आई हैं। इस आपदा ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है।
चीन पर नेपाल ने क्यों उठाए सवाल?
नेपाल का दावा है कि चीन के केरुंग क्षेत्र में झील फटने के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी नेपाल पहुंचा। नेपाल के अनुसार करीब दो करोड़ घन मीटर पानी नीचे की ओर आया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि चीन ने समय रहते इसकी जानकारी नहीं दी। नेपाल का कहना है कि अगर पहले चेतावनी मिलती तो प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सकता था।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल के रास्ते आगे बढ़ती है। ऐसी सीमा-पार नदियों में अचानक पानी बढ़ने की घटना का असर भारत तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि बिहार और उत्तर प्रदेश में भी निगरानी बढ़ाई गई। गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोलने और एनडीआरएफ की तैनाती जैसे कदम स्थिति की गंभीरता दिखाते हैं।
मेडोग परियोजना ने बढ़ाई बेचैनी
चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक मेडोग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बना रहा है। यही नदी भारत में सियांग और आगे ब्रह्मपुत्र कहलाती है। प्रस्तावित परियोजना में कई बांध और करीब 60 गीगावाट क्षमता की बिजली उत्पादन योजना शामिल है। परियोजना का भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र में होना भारत के लिए बड़ी चिंता है।
क्या सच में बन सकता है ‘वाटर बम’?
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पहले ही मेडोग परियोजना को ‘वाटर बम’ बता चुके हैं। चिंता यह है कि बड़े भूकंप या भूस्खलन की स्थिति में नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित हो सकता है। हालांकि, नेपाल की मौजूदा बाढ़ को सीधे मेडोग परियोजना से जोड़ना फिलहाल जल्दबाजी होगी। दोनों घटनाओं के बीच ठोस तकनीकी प्रमाण जरूरी हैं।
भारत के सामने बड़ी चुनौती
भारत अरुणाचल प्रदेश में सियांग अपर बहुउद्देशीय परियोजना पर भी काम कर रहा है, जबकि स्थानीय आदिवासी समुदाय इसके प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में हिमालयी नदियों पर बढ़ती परियोजनाओं के बीच पारदर्शी सूचना साझा करना बेहद जरूरी हो गया है। नेपाल की त्रासदी ने यह साफ कर दिया है कि आपदा के समय कुछ घंटों की चेतावनी भी सैकड़ों जिंदगियां बचा सकती है।
पानी अब सिर्फ प्राकृतिक संसाधन नहीं
नेपाल की तबाही एक चेतावनी है कि हिमालय में नदी, बांध, भूकंप और जलवायु जोखिम एक-दूसरे से अलग नहीं हैं। किसी एक देश में लिया गया फैसला दूसरे देश की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए सीमा पार जल परियोजनाओं में पारदर्शिता, रियल-टाइम सूचना और मजबूत आपदा सहयोग अब विकल्प नहीं, जरूरत बन चुके हैं।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


