न्यूज़ीलैंड की राजनीति में हड़कंप: क्या भारत के साथ ‘धोखा’ कर रही है नेशनल पार्टी? विंस्टन पीटर्स के दावों ने मचाई खलबली
न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री और ‘न्यूज़ीलैंड फर्स्ट’ के फायरब्रांड नेता विंस्टन पीटर्स ने अपनी ही सरकार की मुख्य पार्टी ‘नेशनल पार्टी’ पर एक गंभीर बम फोड़ा है। पीटर्स का आरोप है कि भारत-न्यूज़ीलैंड फ़्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के पर्दे के पीछे इमिग्रेशन नियमों में चोरी-छिपे ऐसे बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा मकसद भारतीय नागरिकों के लिए न्यूज़ीलैंड की राह मुश्किल करना है। इस साल अप्रैल में समझौते पर हस्ताक्षर के बाद, यह डील अब औपचारिक स्वीकृति के लिए संसद की मेज पर है। पीटर्स ने दावा किया कि इन बदलावों पर भारत सरकार को पूरी तरह अंधेरे में रखा गया, जबकि सरकारी अधिकारियों ने पहले ही मंत्रियों को आगाह कर दिया था कि इस ‘चालाकी’ से नई दिल्ली के साथ द्विपक्षीय संबंधों को गहरा घाव लग सकता है।
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पीटर्स, जो वर्तमान में तीन-पक्षीय गठबंधन सरकार के अहम स्तंभ हैं और मई 2025 तक उप-प्रधानमंत्री की भूमिका में रहने का समझौता कर चुके हैं, ने संसद में बिल की पहली रीडिंग के दौरान चौंकाने वाले खुलासे किए। 25 जून को उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के साथ शुरुआती माइग्रेशन रियायतों पर सहमति बनने के बाद सरकार ने “गुप्त रूप से” अपना पासा पलट दिया। अपने दावों को पुख्ता करने के लिए उन्होंने इमिग्रेशन मंत्री एरिका स्टैनफोर्ड को दी गई एक गोपनीय ब्रीफिंग का हवाला दिया। हालांकि, कैबिनेट की गोपनीयता की शपथ के चलते उन्होंने विस्तृत विवरण साझा नहीं किए, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर स्पष्ट कहा कि इमिग्रेशन नियमों में यह अचानक बदलाव सिर्फ भारतीयों को निशाना बनाने के लिए है।
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गठबंधन के प्रमुख साथी होने के बावजूद पीटर्स ने अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए दावा किया कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने मंत्रियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी। अधिकारियों का मानना था कि इन प्रस्तावित बदलावों से न्यूज़ीलैंड की अंतरराष्ट्रीय साख गिर सकती है, कानूनी पचड़े खड़े हो सकते हैं और भारत की ओर से कड़ी व्यापारिक जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। पीटर्स के अनुसार, अधिकारियों ने मंत्रियों को आगाह किया कि इन कदमों का असर भारत के साथ द्विपक्षीय रिश्तों और व्यापारिक साख पर पड़ेगा। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि अधिकारियों ने कथित तौर पर इस बात पर चर्चा की थी कि भारतीय प्रतिक्रिया के डर से इन बदलावों की सार्वजनिक घोषणा न करना ही बेहतर है। दिलचस्प बात यह है कि विंस्टन पीटर्स का यह आक्रामक रुख भारत-न्यूज़ीलैंड FTA पर उनके पुराने स्टैंड से बिल्कुल उलट है।
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