ब्रिक्स सम्मेलन: जयशंकर ने दुनिया को दिखाया ‘शांति का मार्ग’, फिलिस्तीन और पश्चिम एशिया के संकट पर भारत का बड़ा बयान
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी मुखर और संतुलित उपस्थिति दर्ज कराई है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पश्चिम एशिया के सुलगते हालातों पर गहरी चिंता जताते हुए स्पष्ट किया कि भारत फिलिस्तीन मुद्दे पर ‘दो-राज्य समाधान’ (Two-State Solution) का अडिग समर्थन करता है। जयशंकर ने जोर देकर कहा कि खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री यातायात और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर मंडराता खतरा वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य की नाजुकता को दर्शाता है।
एएनआई के अनुसार, जयशंकर ने वैश्विक नेताओं को सचेत करते हुए कहा, “पश्चिम एशिया के संघर्ष पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है। जारी तनाव और ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधान पूरी दुनिया के लिए जोखिम भरे हैं।” उन्होंने केवल फिलिस्तीन ही नहीं, बल्कि लेबनान, सीरिया, सूडान, यमन और लीबिया में फैली अस्थिरता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने दुःख जताया कि सूडान में संघर्ष भारी मानवीय क्षति का कारण बन रहा है, जबकि यमन और सीरिया जैसे देश लगातार सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
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इन संकटों का समाधान बताते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि अब निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कूटनीतिक सक्रियता का समय है। उन्होंने एक बेहद प्रभावशाली बात कही: “स्थिरता चुनिंदा नहीं हो सकती और शांति टुकड़ों में नहीं मिल सकती।” जयशंकर ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन, नागरिकों की सुरक्षा और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे को युद्ध से दूर रखना अनिवार्य है। भारत तनाव कम करने और शांति बहाली की किसी भी सकारात्मक पहल में योगदान देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
यह महत्वपूर्ण बैठक एक ऐसे समय में हो रही है जब ईरान और अमेरिका के बीच गहराता तनाव और बढ़ती ऊर्जा कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है। दिल्ली में जुटे ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधि इन आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों पर मंथन कर रहे हैं।
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इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ संगठन के नए सदस्य देशों के राजनयिक भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। विशेष रूप से, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी इस बैठक का हिस्सा हैं। एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अराघची ने ब्रिक्स मंच का उपयोग करते हुए अमेरिका और इजरायल की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने तेहरान के खिलाफ “गैरकानूनी आक्रामकता” का आरोप लगाते हुए सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे युद्ध को रोकने और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन को समाप्त करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाएं।
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