1971 की कड़वी यादों को पीछे छोड़, बांग्लादेश और पाकिस्तान सुलह की राह पर?
न्यूयॉर्क: 1971 के मुक्ति संग्राम की कड़वी यादों और दशकों की दूरी के बाद, बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच सुलह के संकेत मिल रहे हैं। पिछले साल शेख हसीना की सत्ता के अंत के बाद, पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। इसी कड़ी में, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक के इतर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस से मुलाकात की।
व्यापार और आर्थिक संबंधों पर हुई चर्चा:
अंतरिम मुख्य सलाहकार के प्रेस सचिव शफीकुल आलम के अनुसार, बुधवार को हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच व्यापार और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। यह यूनुस और शरीफ के बीच दूसरी मुलाकात थी, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियों को दर्शाती है।
युद्ध अपराधों के मुद्दे और बदलते समीकरण:
बांग्लादेश में युद्ध अपराधों के मुकदमों और व्यापक क्षेत्रीय राजनीति के चलते, पूर्व अवामी लीग सरकार के दौरान ढाका और इस्लामाबाद के संबंध तनावपूर्ण रहे थे। हालांकि, अगस्त 2024 में यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के गठन के बाद से, दोनों देशों के बीच समीकरणों में बदलाव आया है।
13 साल बाद पाकिस्तानी अधिकारी की बांग्लादेश यात्रा:
पिछले महीने, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ढाका की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा की थी, जो 13 वर्षों में किसी भी पाकिस्तानी अधिकारी की बांग्लादेश की पहली राजकीय यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान, डार ने 1971 के नरसंहार के मुद्दे को पहले ही सुलझा लिए जाने का दावा किया था, जिसका ढाका ने खंडन कर दिया था।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर बढ़ी बांग्लादेश की सक्रियता:
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के साथ मुलाकात के अलावा, यूनुस ने न्यूयॉर्क यात्रा के दौरान इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और कोसोवो के राष्ट्रपति वजोसा उस्मानी से भी मुलाकात की। इन मुलाकातों को बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में एक नई ऊंचाई के रूप में देखा जा रहा है।
भारत के लिए नई चिंताएं?
यह ध्यान देने योग्य है कि बांग्लादेश अगले साल होने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक अनिश्चितता का सामना कर रहा है। ऐसे में, बांग्लादेश का पाकिस्तान के साथ बढ़ता मेलजोल भारत के लिए नई चिंताएं खड़ी कर सकता है।
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