ट्रंप का दावा: ओसामा बिन लादेन के खतरे को मैंने पहले ही भांप लिया था!
डोनाल्ड ट्रंप, जो अक्सर अपने दावों से सुर्खियां बटोरते हैं, अब एक नए और सनसनीखेज खुलासे के साथ सामने आए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने 9/11 के आतंकवादी हमलों से काफी पहले ही ओसामा बिन लादेन को एक बड़े खतरे के रूप में पहचाना था। यह दावा उन्होंने नॉरफॉक, वर्जीनिया में नौसेना के 250वें वर्ष समारोह के दौरान किया।
ट्रंप के अनुसार, उन्होंने अपनी किताब में एक साल पहले ही ओसामा बिन लादेन के बारे में लिखा था, और तत्कालीन अमेरिकी सरकार को इस खतरे से आगाह किया था। उनका मानना है कि अगर उनकी बात सुनी गई होती तो शायद इतिहास कुछ और होता। उन्होंने कहा, "इतिहास यह कभी नहीं भूलेगा कि ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर हम किसने हमला किया और जिसने उसे गोलियों से उसे मार गिराया याद रखिए यह सील्स ही थे।"
"फेक न्यूज" भी सच को नहीं दबा सकता!
ट्रंप ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि उन्होंने अपनी किताब "The America We Deserve" (जनवरी 2000 में प्रकाशित) में ओसामा बिन लादेन का जिक्र किया था और उसे "जनता का दुश्मन नंबर एक" बताया था। उनका कहना है कि अगर उनका यह दावा झूठ होता, तो "फेक न्यूज" इसे कभी चलने नहीं देती। यह दर्शाता है कि वह अपने दावों को लेकर कितने आश्वस्त हैं।
"क्रेडिट न मिले तो खुद ले लो" का मंत्र
ट्रंप ने इस मौके पर अपनी एक पुरानी कहावत को भी दोहराया, "अगर कोई आपको किसी बात का क्रेडिट न दे तो खुद ले लो।" उनका यह भी मानना है कि उन्होंने ओसामा बिन लादेन के खतरे को पहचाना, लेकिन उन्हें इसके लिए पर्याप्त श्रेय नहीं मिला।
ओसामा का सफाया: ओबामा सरकार का ऑपरेशन
यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ओसामा बिन लादेन का सफाया 2 मई 2011 को एबटाबाद, पाकिस्तान में अमेरिकी नौसेना सील्स के एक गुप्त अभियान में हुआ था, जिसे "ऑपरेशन नेप्च्यून स्पियर" नाम दिया गया था। इस ऑपरेशन का आदेश तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने दिया था।
ट्रंप का यह दावा उनके पिछले ऐसे ही दावों की कड़ी में देखा जा सकता है, जहां उन्होंने आईएसआईएस नेता अबु बक्र अल-बगदादी की मौत के बाद भी अपनी किताब में बिन लादेन के बारे में चेतावनी देने का जिक्र किया था।
क्या थी ट्रंप की किताब में?
"The America We Deserve" नामक किताब में, ट्रंप ने ओसामा बिन लादेन को "जनता का दुश्मन नंबर एक" बताया था और अमेरिकी विमानों द्वारा उसके शिविरों पर हमलों का जिक्र किया था। हालांकि, किताब में यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है कि उन्होंने तत्कालीन अमेरिकी सरकार को सीधे तौर पर आगाह किया था या नहीं। उस समय की भू-राजनीतिक स्थिति और इराक में हो रहे युद्ध का भी इस किताब में जिक्र था।
यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप के इस नवीनतम दावे पर क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या यह उनके राजनीतिक एजेंडे में कोई नया मोड़ लाता है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


