विश्व मंच पर ट्रंप: पाक पीएम से मुलाकात, भारत के लिए क्या मायने?
संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 80वें उच्च स्तरीय सत्र में मंगलवार को एक अहम कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिलेगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात करेंगे। यह मुलाकात राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के प्रतिष्ठित यूएनजीए मंच से विश्व के नेताओं के लिए पहला संबोधन होगा, जिसकी प्रतीक्षा दुनिया भर को है।
ट्रंप का ‘लंबा भाषण’ और ‘ऐतिहासिक उपलब्धियां’
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने सोमवार को खुलासा किया कि राष्ट्रपति ट्रंप एक "लंबा भाषण" देने वाले हैं। इस भाषण में वे वैश्विक मंच पर अमेरिकी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे और अपने आठ महीने के कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धियों का बखान करेंगे, जिसमें सात ‘वैश्विक युद्धों और संघर्षों का अंत’ भी शामिल है।
भारत-पाकिस्तान मध्यस्थता: ट्रंप का दावा और हकीकत
सत्ता में वापसी के बाद से, ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम करने का श्रेय बार-बार लिया है। उन्होंने "संघर्ष समाप्त" करने का दावा करते हुए 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम नरसंहार के बाद युद्धविराम की मध्यस्थता की बात कही। जवाबी कार्रवाई में, भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसके तहत जैश-ए-मोहम्मद के गढ़ बहावलपुर में आतंकी शिविरों पर सटीक मिसाइल हमले किए गए। इसके तुरंत बाद, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वाशिंगटन की मध्यस्थता वाली "लंबी रात" की बातचीत के बाद दोनों देश "पूर्ण और तत्काल" युद्धविराम पर सहमत हुए। हालांकि, भारत का रुख स्पष्ट रहा है कि युद्धविराम समझौता दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच बिना किसी विदेशी मध्यस्थता के सीधा हुआ था।
ट्रंप-शरीफ मुलाकात: नई दिल्ली के लिए चिंता का सबब?
संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर ट्रंप और शरीफ की मुलाकात, नई दिल्ली के लिए केवल एक सामान्य कूटनीतिक आयोजन नहीं है, बल्कि एक ऐसा संकेत है जिस पर बारीकी से नज़र रखना ज़रूरी है। यह मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब भारत के वाशिंगटन और इस्लामाबाद, दोनों के साथ संबंध कुछ हद तक तनावपूर्ण हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच "मध्यस्थता" करने की ट्रंप की लगातार बयानबाजी नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद, जब भारत ने पाकिस्तान के भीतर आतंकी ढाँचे पर हमला करने की अपनी क्षमता और मंशा का प्रदर्शन किया था।
पाक सेना प्रमुख से मुलाकात: बढ़ाती भारतीय चिंता
यूएनजीए बैठक का समय ऐसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के बीच आ रहा है, जब कुछ हफ़्ते पहले ही ट्रंप ने अमेरिका में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल (अब फील्ड मार्शल) असीम मुनीर से मुलाकात की थी। ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई इस मुलाकात ने भारतीय रणनीतिक हलकों में चिंता की लहर दौड़ाई थी, क्योंकि पाकिस्तानी सेना का आतंकी संगठनों को पनाह देने का इतिहास रहा है। भारतीय सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की बातचीत इस्लामाबाद को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खुद को पीड़ित दिखाने और सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने की अपनी दोहरी नीति जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करती है।
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