रूसी तेल खरीद पर ट्रंप का ‘टैरिफ दाँव’: भारत के साथ तनाव और ‘सुलझे युद्धों’ का दावा!
अमेरिकी राजनीति के धुरंधर, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी बेबाक शैली में भू-राजनीतिक समीकरणों पर बयान दिया है। फॉक्स एंड फ्रेंड्स को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने खुलासा किया कि रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर टैरिफ लगाना कोई आसान दाँव नहीं था, क्योंकि इससे दोनों देशों के बीच तनाव पैदा हो चुका है। पुतिन पर ‘सख्ती’ का मतलब समझाते हुए ट्रंप ने साफ कहा, “देखिए, भारत उनका सबसे बड़ा ग्राहक था। मैंने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया क्योंकि वे रूस से तेल खरीद रहे थे। यह आसान काम नहीं है। यह एक बड़ी बात है और इससे भारत के साथ मतभेद पैदा होते हैं। लेकिन मैं ये पहले ही कर चुका हूँ। मैंने बहुत कुछ किया है।” ट्रंप के इन शब्दों में जहाँ एक ओर चुनौती स्वीकार करने का भाव था, वहीं दूसरी ओर संभावित राजनयिक मतभेदों की स्वीकारोक्ति भी।
उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि रूसी तेल का मुद्दा अमेरिका की तुलना में यूरोप के लिए कहीं अधिक बड़ी समस्या है।
इसे भी पढ़ें: मेरे सब्र का बांध टूटा रहा…यूक्रेन मामले में बात नहीं मान रहे पुतिन तो भड़के ट्रंप
अपने कार्यकाल के दौरान वैश्विक मंच पर अपनी सुलह क्षमताओं का दम भरते हुए, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर कई युद्धों को समाप्त करने का दावा दोहराया। ‘मैंने सात युद्ध सुलझाए हैं,’ उन्होंने दृढ़ता से कहा। ‘मैंने कई युद्ध सुलझाए हैं, जिनमें पाकिस्तान और भारत भी शामिल हैं, लेकिन बड़े युद्ध, जिनमें से कुछ अनसुलझे थे, जैसे कांगो और रवांडा। मैंने उन्हें सुलझाया। यह 31 सालों से चल रहा था, लाखों लोग मारे गए। मैंने ऐसे युद्ध सुलझाए जो अनसुलझे थे।’ ट्रंप के ये दावे वैश्विक कूटनीति में उनके अनूठे दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
इन सब बयानों के बीच, भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए रूसी कच्चे तेल की खरीद का पुरज़ोर बचाव किया है। नई दिल्ली ने बार-बार दोहराया है कि उसकी ऊर्जा खरीद केवल राष्ट्रीय हितों और बाज़ार की बदलती गतिशीलता से ही निर्देशित होती है।
इसे भी पढ़ें: RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले: भारत की बढ़ती ताकत से घबराकर लगाए गए टैरिफ
उधर, भारत में आगामी राजदूत के लिए ट्रंप द्वारा नामित सर्जियो गोर ने पहले ही इस बात पर ज़ोर दिया था कि ट्रंप प्रशासन भारत को अमेरिकी कच्चा तेल और तेल उत्पाद खरीदते देखना चाहता है। उन्होंने भारतीय बाज़ार की विशाल क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि यहाँ का मध्यम वर्ग अमेरिका से भी बड़ा है। उनकी टिप्पणी के अनुसार, दोनों देशों के बीच चल रही व्यापार वार्ता का मुख्य लक्ष्य भी इसी दिशा में केंद्रित है। गोर ने 1.4 अरब से अधिक की आबादी और तेजी से बढ़ रहे मध्यम वर्ग को अमेरिका के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बताया।
अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने एक दिन पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि जैसे ही नई दिल्ली रूस से तेल ख़रीदना बंद कर देगी, भारत के साथ लंबित व्यापार समझौता तेज़ी से आगे बढ़ सकता है।
Discover more from Aware Media News - Hindi News, Breaking News & Latest Updates
Subscribe to get the latest posts sent to your email.


