दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर चीन-अमेरिका का टकराव: वैश्विक बाजार में हलचल!
चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच दुर्लभ पृथ्वी तत्वों (Rare Earth Elements) के निर्यात को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक तनाव गरमाया हुआ है। बीजिंग ने वॉशिंगटन पर वैश्विक बाजार में जानबूझकर भ्रम और अस्थिरता फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय की प्रवक्ता, हे योंगचियान, ने इस मामले पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अमेरिका ने चीन द्वारा लागू किए गए नए निर्यात नियमों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये नियम केवल वैध और नागरिक उद्देश्यों से जुड़े उपयोगों पर लागू होंगे, न कि किसी व्यापक प्रतिबंध के रूप में।
यह महत्वपूर्ण है कि चीन ने 8 नवंबर से नए निर्यात नियम लागू करने की घोषणा की थी, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की लहर दौड़ा दी थी। कई छोटे आयातकों के बीच यह आशंका थी कि क्या उन्हें भी लाइसेंस प्राप्त करना होगा। चीन ने इन चिंताओं को दूर करने के लिए स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि इन नियमों का प्राथमिक उद्देश्य नागरिक और कानूनी उपयोगों को विनियमित करना है, न कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करना।
मामले को और गरमाते हुए, अमेरिकी वाणिज्य सचिव स्कॉट बिसेंट ने चीनी वार्ताकार ली चेंगगांग के प्रति “अनादरपूर्ण” रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में, बीजिंग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि वे संवाद जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वर्तमान जानकारी के अनुसार, चीन का दावा है कि उसके नियंत्रण नियम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं। वहीं, दूसरी ओर, अमेरिका स्वयं 3,000 से अधिक वस्तुओं पर निर्यात नियंत्रण लागू करता है, जो इस मामले में एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
विश्लेषकों का अनुमान है कि यह बढ़ता हुआ विवाद नवंबर में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच संभावित बैठक को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल, चीन अपनी निर्यात नीति पर अडिग प्रतीत होता है, जबकि अमेरिका के बयानों ने वैश्विक व्यापारिक माहौल में निश्चित रूप से अतिरिक्त तनाव घोल दिया है।
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