भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता: सहयोग और प्रगति की नई उड़ान
मंगलवार को, भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, न्यूजीलैंड के अपने समकक्ष टॉड मैक्ले से मिलने के लिए यहां पहुंचे, ताकि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की दिशा में हो रही प्रगति की समीक्षा की जा सके। इस महत्वपूर्ण बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना है।
“एक्स” पर मंत्री गोयल का उत्साह
मंत्री गोयल ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी यात्रा को लेकर उत्साह व्यक्त करते हुए कहा, “वर्तमान एफटीए वार्ता की प्रगति की समीक्षा के लिए न्यूजीलैंड पहुंच खुश हूं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश एक व्यापक और पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक साझेदारी की प्रक्रिया को तेज करने के लिए उत्सुक हैं।
सहयोग के नए रास्ते और निवेश के अवसर
गोयल ने यह भी बताया कि वह उद्योग जगत के प्रमुख नेताओं और निवेशकों से भी मुलाकात करेंगे। इस मुलाक़ात का लक्ष्य भारत और न्यूजीलैंड के बीच सहयोग के नए रास्ते तलाशना और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना है।
एफटीए वार्ता का चौथा दौर और भविष्य की राह
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए वार्ता का चौथा दौर 3 नवंबर को ऑकलैंड में शुरू हुआ था, जो इस समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। औपचारिक रूप से, एफटीए वार्ता 16 मार्च 2025 को शुरू की गई थी, और अब यह अपने अंतिम चरणों में है।
आर्थिक संबंधों में तीव्र वृद्धि
वित्त वर्ष 2024-25 में, न्यूजीलैंड के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को पार कर गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 49 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्शाता है। यह वृद्धि दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों का स्पष्ट संकेत है।
भारत के प्रमुख निर्यात और न्यूजीलैंड के प्रमुख आयात
न्यूजीलैंड को भारत से प्रमुख निर्यात वस्तुओं में वस्त्र, कपड़े, घरेलू वस्त्र, दवाइयां और चिकित्सकीय सामग्री, परिष्कृत पेट्रोल, कृषि उपकरण व मशीनरी (जैसे ट्रैक्टर और सिंचाई उपकरण), मोटर वाहन, लोहा व इस्पात, कागज उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक सामान, झींगे, हीरे और बासमती चावल शामिल हैं।
वहीं, भारत न्यूजीलैंड से कृषि उत्पाद, खनिज, सेब, कीवी, मांस उत्पाद (जैसे भेड़ का मांस, मटन), दूध एल्ब्यूमिन, लैक्टोज सिरप, कोकिंग कोल, लट्ठे व लकड़ी, ऊन और ‘स्क्रैप’ धातुएं आयात करता है।
यह मुक्त व्यापार समझौता न केवल दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि सहयोग के नए द्वार भी खोलेगा, जिससे भविष्य में और भी अधिक विकास की उम्मीद है।
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