आईपीओ मूल्यांकन पर सेबी का रुख: ‘निवेशक का फैसला’
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में ऊंचे मूल्यांकन को लेकर चल रही चिंताओं पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि पूंजी बाजार नियामक इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा। पांडेय ने कहा, “हम मूल्यांकन का निर्धारण नहीं करते। यह पूरी तरह से निवेशक के आकलन पर निर्भर करता है।”
लेंसकार्ट के 7,200 करोड़ रुपये के आईपीओ की कीमत को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच यह टिप्पणी आई है। पांडेय ने जोर दिया कि बाजार को अवसरों के आधार पर मूल्य निर्धारण स्वतंत्र रूप से करना चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब आईपीओ मूल्यांकन को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई हैं; अतीत में नाइका या पेटीएम जैसी डिजिटल कंपनियों के आईपीओ के दौरान भी यह मुद्दा उठा था।
ईएसजी: ‘ब्रांडिंग नहीं, प्रामाणिकता’
वहीं, एक्सीलेंस इनेबलर्स द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में पांडेय ने कंपनियों से पर्यावरण, सामाजिक एवं प्रबंधन (ईएसजी) प्रतिबद्धताओं के प्रति अधिक ‘प्रामाणिक’ होने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “ईएसजी को प्रामाणिक होना चाहिए, न कि केवल एक ब्रांडिंग अभ्यास।” पांडेय के अनुसार, ईएसजी को मापने योग्य परिणामों से जोड़ा जाना चाहिए, स्वतंत्र जांच के अधीन होना चाहिए और बोर्ड के वास्तविक निरीक्षण में निहित होना चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईएसजी अब वैकल्पिक नहीं है, बल्कि व्यवसायों को इसे लाभ में बदलना चाहिए, न कि केवल एक अनुपालन दायित्व के रूप में देखना चाहिए।
निर्देशकों के लिए नई क्षमताएं
पांडेय ने कंपनियों के निदेशकों और वरिष्ठ प्रबंधन को साइबर जोखिम, व्यवहार विज्ञान, डेटा नैतिकता और स्थिरता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी क्षमताओं को मजबूत करने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा, “आज के बाजार की जटिलता औपचारिक निरीक्षण से कहीं अधिक सूचित निर्णय की मांग करती है।”
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